नासा तक पहुंचा करनाल का बेटा, UK में साइंटिस्ट:खास रिसर्च की; प्रसव के दौरान हर साल बचेंगी 5 हजार से ज्यादा जिंदगी

नासा तक पहुंचा करनाल का बेटा, UK में साइंटिस्ट:खास रिसर्च की; प्रसव के दौरान हर साल बचेंगी 5 हजार से ज्यादा जिंदगी




करनाल के चिड़ाव गांव का एक युवा अपनी मेहनत और लगन के दम पर विदेश में वैज्ञानिक बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और देश का नाम रोशन कर रहा है। कठिन हालात और निजी दुखों से प्रेरणा लेकर इस युवा ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जहां उसकी रिसर्च से हर साल हजारों लोगों की जान बचाने की उम्मीद है। चिड़ाव गांव निवासी डॉ. अनुज नरवाल बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहे हैं। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे प्रताप पब्लिक स्कूल करनाल में 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उनका चयन नासा के लिए हुआ। प्रतिभा के कारण ही वे वहां तक पहुंचे। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और यहीं से उन्होंने वैज्ञानिक बनने का सपना मजबूत किया। कैंसर से हुई पारिवारिक मौतों ने जगाई रिसर्च की सोच डॉ. अनुज नरवाल के जीवन में एक दुखद घटना ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। करीब 12 साल पहले उनकी बुआ शकुंतला की कैंसर से मौत हो गई थी। इसके अलावा उनके ताऊ कैप्टन शमशेर सिंह भी कैंसर से पीड़ित रहे। इन घटनाओं ने अनुज के मन में यह ठान दिया कि वे वैज्ञानिक बनकर गंभीर बीमारियों का इलाज खोजेंगे, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। शिक्षा का सफर: भारत से यूके तक हासिल की बड़ी डिग्रियां 25 वर्षीय अनुज नरवाल ने वर्ष 2017 में प्रताप पब्लिक स्कूल से मेडिकल स्ट्रीम में 12वीं पास की। 12वीं के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए वे यूके चले गए, जहां से उन्होंने बीएससी-बायोमेडिकल की पढ़ाई की और उन्होंने वर्ष 2020 में बैंगोर यूनिवर्सिटी से मेडिकल साइंसेज में स्नातक किया। इसके बाद वर्ष 2021 में यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो से कैंसर रिसर्च और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी में मास्टर्स डिग्री हासिल की। फिर वर्ष 2022 से 2026 तक यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन से हीमैटोलॉजी और इम्यूनोलॉजी में पीएचडी पूरी की। इम्यूनोथ्रोम्बोसिस पर कर रहे रिसर्च डॉ. अनुज नरवाल वर्तमान में एक एक्सपेरिमेंटल पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनकी रिसर्च का मुख्य क्षेत्र इम्यूनोथ्रोम्बोसिस है। थ्रोम्बोसिस और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया में उनकी गहरी समझ उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी का नेतृत्व करने की मजबूत स्थिति में रखती है। शोध पत्रों से सामने आए बड़े निष्कर्ष डॉ. अनुज नरवाल के अब तक प्रमुख जर्नल्स में 3 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें जर्नल ऑफ थ्रोम्बोसिस एंड हीमोस्टेसिस और फ्रंटियर्स इन कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन शामिल हैं। उनकी रिसर्च से ऐसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं, जिनसे प्रसव के दौरान हर साल करीब 5 हजार से ज्यादा महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। रेडिंग्स यूनिवर्सिटी में कर रहे पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च डॉ. अनुज नरवाल अब यूके की रेडिंग्स यूनिवर्सिटी में पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च के रूप में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे लगातार नए शोध कर रहे हैं और अपने जिले व देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। परिवार में शिक्षा और सफलता की मजबूत नींव डॉ. अनुज नरवाल का परिवार भी शिक्षा और उपलब्धियों से भरा हुआ है। उनकी मां गीता नरवाल भैणी खुर्द के सरकारी स्कूल में केमिस्ट्री लेक्चरर हैं। उनके पिता भीम सिंह नरवाल पीएनबी बैंक से चीफ मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अब वकालत कर रहे हैं। उनके बड़े भाई अनुभव नरवाल अमेरिका के कैपिटल-वन बैंक में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। वहीं उनके ताऊ कैप्टन शमशेर सिंह पायलट रहे हैं और इंडियन एयरलाइंस में डीजीएम के पद पर भी रह चुके हैं। गुरुओं और माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय डॉ. अनुज नरवाल अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, ताऊ और अपने शिक्षकों को देते हैं। उन्होंने विशेष रूप से अपने बायोलॉजी टीचर डॉ. उर्मिला गौतम और फिजिक्स लेक्चरर डॉ. रविंद्र चौधरी का नाम लिया, जिनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वे इस मुकाम तक पहुंचे। वहीं, उनकी मां गीता नरवाल का कहना है कि उन्होंने कभी अनुज की पढ़ाई में सीधे मदद नहीं की, बल्कि उसने अपनी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन से यह सफलता हासिल की है। उन्हें उम्मीद है कि उनका बेटा आगे भी इसी तरह देश का नाम रोशन करता रहेगा।



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