एलपीजी किल्लत के बीच मोगा के किसान की मिसाल:बायोगैस से आत्मनिर्भर बना परिवार, वर्षों से बिना सिलेंडर चला रहा घर

एलपीजी किल्लत के बीच मोगा के किसान की मिसाल:बायोगैस से आत्मनिर्भर बना परिवार, वर्षों से बिना सिलेंडर चला रहा घर




देशभर में एलपीजी गैस की किल्लत के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है। गैस सिलेंडर के लिए घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। ऐसे समय में मोगा जिले के गांव राजेआना के किसान निर्मल सिंह बायोगैस का उपयोग कर बिना किसी दिक्कत के अपने घर में खाना बना रहे हैं। उन्होंने बायोगैस के माध्यम से आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसान निर्मल सिंह ने वर्ष 2011 में 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट लगाया था। इस प्लांट में पशुओं के गोबर और जैविक कचरे का उपयोग कर गैस बनाई जाती है। उनके परिवार ने पिछले कई वर्षों से इसी गैस का इस्तेमाल रसोई के लिए किया है।वर्तमान में एलपीजी गैस की कमी और महंगे सिलेंडरों से लोग जूझ रहे हैं। निर्मल सिंह बोले- बायो गैस प्लांट से आर्थिक लाभ मिला इसके विपरीत, निर्मल सिंह को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्हें न तो गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और न ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। निर्मल सिंह के अनुसार, बायोगैस प्लांट ने उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ पहुँचाया है। उन्होंने वर्षों में लाखों रुपये की बचत की है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया है। बायोगैस प्लांट से निकलने वाली स्लरी (अपशिष्ट) जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग होती है, जिससे फसल की पैदावार में सुधार होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो एलपीजी पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और कृषि में भी सुधार होगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है।



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