Kejriwal Seeks Recusal of Justice Swaran Kanta Sharma
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नई दिल्ली13 मिनट पहले
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अरविंद केजरीवाल कोर्ट पहुंचे।
दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस दौरान दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल खुद अपनी दलीलें रख रहे है। केजरीवाल ने इस केस की जज स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग (रिक्यूज) करने की मांग की है।
CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एएसजी एसवी राजू और डीपी सिंह ने एजेंसी का पक्ष रखा। जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच केस की सुनवाई कर रही है।
केजरीवाल ने हाईकोर्ट के सामने 10 दलीलें रखी, जिसके आधार पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को इस केस से अलग करने की मांग की।
उन्होंने कोर्ट में कहा कि जिस तरह से ED और CBI ने पहले गवाहों को गिरफ्तार किया, फिर उनसे सौदेबाजी की। उसके बाद दूसरों का नाम लेते हुए बयान दर्ज करवाए। गवाहों के बयानों को लेकर अदालत की टिप्पणियां ऐसी थीं, मानो मुझे दोषी और भ्रष्ट ही मान लिया गया हो।
केजरीवाल की दलीलें सुनकर बेंच ने कहा- आपने बहुत अच्छा तर्क रखा। आप वकील भी बन सकते हैं।
इससे पहले इस मामले में 6 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर कोई जज को मामले से हटाने की मांग वाली अर्जी देना चाहता है, तो दे सकता है। CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को शराब घोटाला केस में बरी कर दिया था।
केजरीवाल की कोर्टरूम में 9 बड़ी दलीलें…
- 9 मार्च को सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई मौजूद नहीं था। बिना उनकी बात सुने कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर 40,000 पेज के दस्तावेज पढ़कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया।
- आदेश आया तो मेरा दिल बैठ गया। मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि डिस्चार्ज आदेश को सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही रोका जा सकता है। लेकिन मेरे मामले में मुझे सुने बिना ही आदेश आंशिक रूप से रोक दिया गया। मेरे हिसाब से उस आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट का पूरा फैसला लगभग बेअसर हो गया।
- कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि एडवांस नोटिस दिया गया था, लेकिन मैं पेश नहीं हुआ। यह सही नहीं है। मैं लगातार इस केस में मौजूद रहा हूं। आदेशों में जिस तरह की भाषा इस्तेमाल हुई, उससे मुझे लगा कि मेरे खिलाफ पहले से राय बना ली गई है।
- जिस तरह से ED और CBI ने पहले गवाहों को गिरफ्तार किया, फिर उनसे सौदेबाजी की। उसके बाद दूसरों का नाम लेते हुए बयान दर्ज करवाए। इस पर इस अदालत ने भी टिप्पणी की है। गवाहों के बयानों को लेकर अदालत की टिप्पणियां ऐसी थीं, मानो मुझे दोषी और भ्रष्ट ही मान लिया गया हो।
- CBI का पूरा केस एप्रूवर के बयानों पर आधारित है। लेकिन कोर्ट ने उन पर पहले ही मजबूत टिप्पणियां कर दीं, जबकि ट्रायल कोर्ट ने उन पर सवाल उठाए थे।
- मैंने देखा है कि इस केस और इसी मामले से जुड़े अन्य आरोपियों, जैसे मनीष सिसोदिया के केस की सुनवाई बहुत तेजी से हो रही है। ऐसी गति किसी और केस में नहीं दिखती। दोनों ही मामले विपक्षी नेताओं से जुड़े हैं।
- मुझे ऐसा लग रहा है कि CBI और ED की हर दलील को स्वीकार किया जा रहा है और आदेश उनके पक्ष में जा रहे हैं। इन सभी कारणों से मेरे मन में यह गंभीर आशंका पैदा हुई है कि मुझे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी
- पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक मुद्दा चल रहा है कि जजों के करीबी लोगों को लेकर एक पुरानी परंपरा रही है। एक पुरानी परंपरा थी कि अगर जजों के करीबी लोग किसी पक्ष से जुड़े होते थे, तो जज उस मामले से खुद को अलग कर लेते थे।
इसी मामले में बुधवार को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर अरविंद केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध किया है। CBI ने कहा कि ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ (ABAP) के सेमिनार में शामिल होने का मतलब ये नहीं है की जस्टिस शर्मा का झुकाव किसी खास संगठन की तरफ है।
27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।
ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।
साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।
केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे
दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।
इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।
इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।
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