एमएसपी फर्जीवाड़ा…:खुद के पास एक इंच जमीन नहीं, दूसरों के खेत का पंजीयन कर बने ‘किसान’
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी की आड़ में एक बड़े सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को चूना लगाने की तैयारी कर ली है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि बाजार और सरकारी भाव के बीच के अंतर का फायदा उठाने के लिए भिंड, मुरैना और राजगढ़ जिलों में ऐसे लोगों के नाम पर 10 हेक्टेयर (करीब 40 बीघा) तक पंजीयन कर दिए गए, जिनके पास एक इंच भी जमीन नहीं है। भास्कर ने पंजीयन रसीद और खसरा नंबरों की जांच कर यह फर्जीवाड़ा पकड़ा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन किसानों की जमीन इन पंजीयन से जोड़ी गई, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। ज्यादातर पंजीयन अंतिम तारीख के आसपास और देर रात में किए गए, जिससे यह साफ होता है कि पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया गया। प्रदेश में गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में भाव 2000–2200 रुपए है। यानी प्रति क्विंटल 425 से 625 रुपए का सीधा अंतर। इसी अंतर की कमाई को जायज बनाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीयन किए गए। डेडलाइन की आड़ में खेल:
गेहूं बेचने के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख पहले 7 मार्च थी, जिसे बढ़ाकर 10 मार्च किया गया। ज्यादातर फर्जी पंजीयन 5 से 10 मार्च के बीच हुए। कई एंट्री रात 11 बजे के बाद की हैं। इससे साफ है कि अंतिम तारीख को जानबूझकर चुना गया, ताकि जिन किसानों ने पंजीयन नहीं कराया, उनकी जमीन का उपयोग किया जा सके। …और जिनकी जमीन का पंजीयन, उन्हें पता ही नहीं • लहार के बसंतपुर निवासी अशोक सिंह के परिवार के संयुक्त खाते में करीब 14 बीघा जमीन है। दो साल से उन्होंने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए कोई पंजीयन नहीं कराया, फिर भी जमीन का पंजीयन महेश तिवारी के नाम से कर दिया गया।
• अशोक बोले- परिवार के किसी सदस्य से न अनुमति ली गई, न जानकारी दी गई। अब इसकी शिकायत करेंगे। • रौन के बसंतपुर निवासी श्रीकृष्ण कुशवाहा और उनके भाई हरिकिशन के नाम करीब 7.5 बीघा जमीन है, जिसमें उन्होंने सरसों और गेहूं बोया, लेकिन पंजीयन नहीं कराया।
• इसके बावजूद उनकी जमीन का पंजीयन महेश तिवारी के नाम से कर दिया गया। श्रीकृष्ण का कहना है कि न उनसे अनुमति ली गई, न उन्हें इसकी जानकारी है। राजगढ़ में भी किसानों से मंजूरी नहीं ली… राजगढ़ में मोहन सौंधिया के पंजीयन में केशर सिंह, मांगीलाल और भागीरथ सिंह की जमीन शामिल कर दी गई, जबकि इन किसानों ने भी किसी तरह की अनुमति देने से इनकार किया।
हम सैटेलाइट मैप से जांच करवाएंगे: कमिश्नर हमने सैटेलाइट मैप से जांच करवाई है। सभी कलेक्टर को फील्ड में वेरिफिकेशन करने के लिए कहा है। आपके पास भी यदि कोई स्पेसिफिक जानकारी है तो मुझे शेयर कर दीजिए। मैं उसमें कलेक्टर से जांच कर कार्रवाई करवाऊंगा।
– कमलेश शर्मा, कमिश्नर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण
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