Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board
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नई दिल्ली12 मिनट पहले
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बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹5,465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4,480 करोड़ के मुकाबले इसमें 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कंपनी ने अच्छे नतीजों के साथ ही यह भी जानकारी दी है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की बड़ी वजह बैड लोन (फंसे हुए कर्ज) के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में कमी आना है।
विश्लेषकों ने इस तिमाही में ₹5,490 करोड़ के मुनाफे का अनुमान लगाया था, कंपनी के नतीजे लगभग उसी के आसपास रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू भी 18% बढ़कर ₹21,606 करोड़ पर पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹18,294 करोड़ था।
राजीव बजाज 30 जुलाई को पद छोड़ेंगे
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि राजीव बजाज ने बोर्ड से हटने की इच्छा जताई है। वे कंपनी की अपकमिंग एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे।
ऐसे में 30 जुलाई 2026 को होने वाली AGM के बाद वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद को छोड़ देंगे। बोर्ड ने कंपनी में उनके लंबे योगदान की सराहना की है।
शेयरहोल्डर्स को ₹6 का डिविडेंड मिलेगा
रिजल्ट के साथ ही कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड की घोषणा भी की है। इसमें ₹0.60 का स्पेशल डिविडेंड भी शामिल है, जो बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों की बिक्री से हुए फायदे के तौर पर दिया जा रहा है।
इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 30 जून 2026 तय की गई है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारकों के देती हैं, इसे डिविडेंड या लाभांश कहा जाता है।
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 21% की ग्रोथ
बजाज फाइनेंस की लोन बुक यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट में शानदार बढ़त देखी गई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का AUM 21% बढ़कर ₹3,72,986 करोड़ हो गया है, जो एक साल पहले ₹3,08,832 करोड़ था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 20% बढ़कर ₹10,716 करोड़ रही।
एसेट क्वालिटी में सुधार और MSME सेगमेंट का हाल
- कंपनी की एसेट क्वालिटी पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुई है। ग्रॉस NPA 0.29% से घटकर 0.27% पर आ गया है, जबकि नेट NPA 0.11% पर स्थिर है।
- हालांकि, कंपनी MSME सेगमेंट में बढ़ते बैड लोन की समस्या से जूझ रही थी, लेकिन इस बार कुल प्रोविजन ₹2,167 करोड़ से घटकर ₹2,008 करोड़ रह गया है।
- कंपनी ने भविष्य के आर्थिक जोखिमों के लिए ₹142 करोड़ का अतिरिक्त क्रेडिट लॉस प्रोविजन भी रखा है।
क्या होता है AUM, प्रोविजनिंग और स्पेशल डिविडेंड
- एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): किसी फाइनेंस कंपनी के पास मौजूद कुल लोन और निवेश की वैल्यू को AUM कहते हैं।
- स्पेशल डिविडेंड: जब कंपनी को किसी संपत्ति की बिक्री या अचानक बड़ा मुनाफा होता है, तो वह नियमित डिविडेंड के अलावा जो अतिरिक्त राशि देती है, उसे स्पेशल डिविडेंड कहते हैं।
- प्रोविजनिंग क्यों जरूरी: बैंकों और NBFC को भविष्य में होने वाले संभावित घाटे या न चुकाए जाने वाले लोन के लिए मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना पड़ता है, इसे ही प्रोविजनिंग कहते हैं।

