सीरियल किलर के रिश्तेदार के शव के पंचनामा में गड़बड़ी:लखनऊ में RPF की हिरासत में मौत, पीएम में देरी से सीधे श्मशान घाट पहुंचा शव

सीरियल किलर के रिश्तेदार के शव के पंचनामा में गड़बड़ी:लखनऊ में RPF की हिरासत में मौत, पीएम में देरी से सीधे श्मशान घाट पहुंचा शव




लखनऊ में रेलवे के नल की टोटियां चोरी करने के आरोप में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा हिरासत में लिए गए 55 वर्षीय प्रभात कुमार कन्नौजिया की 9 मई, शनिवार तड़के इलाज के दौरान मौत हो गई। 10 मई, रविवार देर शाम उनका पिपराघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, पोस्टमॉर्टम और पंचनामा की प्रक्रिया में देरी होने से परिजनों को शव काफी देर से मिला, जिसके चलते अंतिम संस्कार में देरी हुई। प्रभात कुमार कन्नौजिया सदर लालकुर्ती इलाके के रहने वाले थे। गोमतीनगर रेलवे स्टेशन यार्ड में संविदा पर सफाई कर्मी के रूप में काम करते थे। वह सीरियल किलर सलीम की पत्नी व छावनी परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष अंजुम आरा की बहन मीनू का पति थे। पंचनामा में गड़बड़ी से बढ़ी देरी मृतक के शव को पहले लोहिया संस्थान से केजीएमयू पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा गया, लेकिन वहां पता चला कि पंचनामा गलत तरीके से भरा गया है। सूत्रों के मुताबिक, पहले सिविल मजिस्ट्रेट ने पंचनामा भरा था, जबकि रेलवे से जुड़े मामले में रेलवे मजिस्ट्रेट द्वारा पंचनामा होना चाहिए था। इसके बाद शव को दोबारा लोहिया संस्थान लाया गया और देर शाम तक कागजी कार्रवाई चलती रही। इसकी वजह से शनिवार को शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया। घर पर बनाई गई थी टिट्ठी, इंतजार के बाद हटानी पड़ी परिजनों को उम्मीद थी कि रविवार को जल्दी पोस्टमॉर्टम हो जाएगा। शव दोपहर तक मिल जाएगा। दोपहर में शव आने की उम्मीद में परिवार ने सदर स्थित घर पर अंतिम यात्रा की तैयारी कर ली थी। टिट्ठी (शव रखने के लिए बांस से तैयार किया जाने वाला ढांचा) भी तैयार करवा ली थी, लेकिन देर तक शव नहीं आया। इस पर वहां से टिट्‌ठी हटा लिया गया। पोस्टमॉर्टम हाउस से शव सीधे श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कर कर दिया गया। परिवार के लोगों ने कहा उनकी तबीयत पहले से खराब रहती थी। हिरासत में लिए जाने के बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। अब हमें इस मामले में कुछ कहना और कार्रवाई नहीं चाहते हैं। यह मामला पूरी तरह से प्राकृतिक है। पड़ोसियों ने बताया मिलनसार इंसान थे प्रभात के पड़ोसी अशफाक ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी अखबारों से मिली। उन्होंने कहा कि प्रभात बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। लोगों से अच्छे संबंध रखते थे और मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते थे। एक अन्य पड़ोसी राज ने कहा कि जब हम अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। वह कभी किसी विवाद या घटना में शामिल नहीं रहे। आखिर क्या हुआ, यह समझ नहीं आ रहा। शाम 7 बजे हिरासत में लिए गए, रात में बिगड़ी तबीयत आरपीएफ के मुताबिक, पुष्पक एक्सप्रेस के कोचों से पिछले एक सप्ताह से महंगी टोटियां चोरी हो रही थीं। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर प्रभात कुमार संदिग्ध रूप में दिखाई दिए। शुक्रवार शाम करीब 7 बजे उन्हें गोमतीनगर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया। परिजनों ने कहा था कि हिरासत में लिए जाने के करीब तीन घंटे बाद रात 10 बजे उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद रात 1 बजे उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो सकेगा। कबाड़ी को टोटियां बेचने का आरोप आरपीएफ के अनुसार, पूछताछ में सदर इलाके के कबाड़ी दिनेश वर्मा का नाम सामने आया है। प्रभात चोरी की गई रेलवे कोचों की टोटियां वहीं बेचता था। पुलिस ने कबाड़ी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आरपीएफ इंस्पेक्टर एमए अंसारी ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।



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