डीएमएफ नियमों में बदलाव, अब 25 किमी तक डेवलपमेंट:डिजिटल होंगे पेमेंट, 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे खनिज प्रभावित क्षेत्रों में होगा खर्च

डीएमएफ नियमों में बदलाव, अब 25 किमी तक डेवलपमेंट:डिजिटल होंगे पेमेंट, 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे खनिज प्रभावित क्षेत्रों में होगा खर्च




राज्य सरकार ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) नियमों में बड़ा संशोधन किया है। सरकार ने तय किया है कि खदान अथवा खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा, जबकि 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाएगा। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष विकास और कल्याणकारी योजनाएं लागू होंगी। नई व्यवस्था में जिला खनिज प्रतिष्ठान द्वारा किए जाने वाले भुगतान अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे। साथ ही योजनाओं की निगरानी और खर्च का लेखा-जोखा भी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। पांच वर्षीय योजनाओं के तहत होगा काम खनिज साधन विभाग द्वारा किए गए नियमों में बदलाव के बाद अब खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए पांच वर्षीय और वार्षिक योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, महिला एवं बाल कल्याण, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। खनिज साधन विभाग की ओर से इसको लेकर किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार जिला खनिज प्रतिष्ठान की योजनाएं ग्राम सभा, पंचायत, नगरीय निकाय तथा प्रभावित समुदायों से मिले सुझावों के आधार पर बनाई जाएंगी। योजनाओं के निर्माण में प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की सहायता भी ली जा सकेगी। पांच वर्षीय योजना का अनुमोदन जिला खनिज प्रतिष्ठान के मंडल द्वारा किया जाएगा तथा इसे जिले के पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाएगा। इस व्यवस्था के बाद अब जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि का उपयोग अधिक व्यवस्थित और प्राथमिकता आधारित तरीके से किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में होगा फोकस सरकार ने स्पष्ट किया है कि खदान अथवा खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा, जबकि 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाएगा। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष विकास और कल्याणकारी योजनाएं लागू होंगी। संशोधित नियमों में पेयजल आपूर्ति, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और स्कूल-कॉलेजों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। खनन प्रभावित क्षेत्रों में अस्पताल, मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं, चिकित्सकीय उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में छात्रावास, पुस्तकालय, ई-लर्निंग सुविधाएं और छात्रवृत्ति योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं दिव्यांगजन सहायता, स्वच्छता अभियान, आवास योजना और कृषि आधारित गतिविधियों को भी नई योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने कौशल विकास और आजीविका सृजन पर भी फोकस करते हुए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार से जोड़ने के प्रावधान किए हैं। नई व्यवस्था में जिला खनिज प्रतिष्ठान द्वारा किए जाने वाले भुगतान अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे। साथ ही योजनाओं की निगरानी और खर्च का लेखा-जोखा भी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास करना, पर्यावरणीय नुकसान को कम करना और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। अधिसूचना में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि का न्यूनतम 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे खनिज प्रभावित क्षेत्रों के विकास कार्यों पर खर्च होगा। वहीं शेष राशि अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं और जनहित परियोजनाओं पर उपयोग की जा सकेगी। मॉनिटरिंग समिति का किया गया गठन सरकार ने निधि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा योजनाओं की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति का गठन भी किया गया है। समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे, जो योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय उपयोग की समीक्षा करेंगे। राज्य स्तरीय समिति में मुख्य सचिव अध्यक्ष होंगे, जबकि प्रमुख सचिव वित्त, ग्रामीण विकास, लोक निर्माण विभाग, योजना, खान मंत्रालय भारत सरकार के नामिनेटेड सदस्य, प्रमुख सचिव खनिज साधन और समिति के अध्यक्ष की अनुमति से दूसरे विभागों के प्रमुख सचिव इसके सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव खनिज साधन समिति के सदस्य सचिव होंगे। बिना परमिशन काम में उपयोग नहीं होगा पैसा नई नियमावली के अनुसार, बिना अनुमति किसी अन्य मद में निधि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी परियोजना में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो राज्य सरकार को संबंधित कार्य रोकने और राशि वापस लेने का अधिकार होगा।



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