केन-बेतवा विस्थापितों का जल सत्याग्रह उग्र:उफनती नदी में छठे दिन भी डटे, बोले-हक दो या जल समाधि दे दो; ₹12.50 लाख पैकेज का आश्वासन

केन-बेतवा विस्थापितों का जल सत्याग्रह उग्र:उफनती नदी में छठे दिन भी डटे, बोले-हक दो या जल समाधि दे दो; ₹12.50 लाख पैकेज का आश्वासन




पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से विस्थापित आदिवासी और किसान छठे दिन भी जल सत्याग्रह पर डटे रहे। उफनती नदी के बीच पानी में खड़े प्रदर्शनकारी उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उफनती नदी के बीचों-बीच चल रहे इस ‘चिता आंदोलन’ में प्रदर्शनकारी पानी में खड़े होकर न्याय की मांग कर रहे हैं।आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे सत्याग्रह समाप्त नहीं करेंगे। बारिश और तेज बहाव के बीच जारी सत्याग्रह मूसलाधार बारिश और नदी के तेज बहाव के बावजूद पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग घुटने से लेकर सीने तक पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी ‘अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे लगाते हुए अपनी मांगों पर अड़े हैं। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में जल सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन और मिट्टी सत्याग्रह भी जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास दे या फिर इसी जल सत्याग्रह में उनकी मौत होने दे। अधिकारियों के पहुंचने पर बढ़ा तनाव आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर पीने के साफ पानी की व्यवस्था बंद करा दी है। इसके कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग नदी का मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। उनका दावा है कि दूषित पानी पीने से कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारी दिव्या आदिवासी ने बताया कि बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों पर विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय डराने-धमकाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है। विस्थापितों की प्रमुख मांगें आंदोलनकारी सभी प्रभावित परिवारों को नियमानुसार भूमि और पक्का आवास देने, उचित मुआवजा उपलब्ध कराने, मुआवजा वितरण में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि आंदोलन कर रहे आदिवासियों और किसानों के खिलाफ कार्रवाई बंद की जाए। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने मझगांय, रूंझ और केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार ₹12.50 लाख तक का एकमुश्त पुनर्वास अनुदान दिया जाएगा। 2500 से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ विधायक के अनुसार मझगांय परियोजना के 1,450 परिवारों को करीब ₹181 करोड़, रूंझ परियोजना के 730 परिवारों को ₹91.25 करोड़ और केन-बेतवा लिंक परियोजना के पन्ना जिले के 313 विस्थापित परिवारों को भी इस पैकेज का लाभ मिलेगा। जो परिवार शासकीय भूखंड नहीं लेंगे, उन्हें ₹12.50 लाख नकद दिए जाएंगे। शहरी क्षेत्र में भूखंड लेने पर ₹6.50 लाख और ग्रामीण क्षेत्र में भूखंड लेने पर ₹7 लाख का अनुदान मिलेगा। रजिस्ट्री पर स्टाम्प और पंजीयन शुल्क भी शासन वहन करेगा। आंदोलन जारी, समाधान का इंतजार प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल पैकेज की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक सभी वास्तविक विस्थापितों को उनका अधिकार और पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन की ओर से अब तक आंदोलन समाप्त कराने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।



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