10 हजार से ज्यादा स्काडा सिस्टम से सिंचाई पर निगरानी:डेम से खेत तक पाइपलाइन से पहुंच रहा पानी, डिमांड के अनुसार चालू-बंद होते हैं पंप

10 हजार से ज्यादा स्काडा सिस्टम से सिंचाई पर निगरानी:डेम से खेत तक पाइपलाइन से पहुंच रहा पानी, डिमांड के अनुसार चालू-बंद होते हैं पंप




भोपाल संभाग के कमिश्नर ने गुरुवार को राजगढ़ जिले की मोहनपुरा-कुंडलिया वृहद सिंचाई परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने डेम से सीधे किसानों के खेतों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में 10 हजार से अधिक SCADA सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से पानी की सप्लाई और पंप संचालन ऑटोमेटिक तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है। कमिश्नर ने एआई और सैटेलाइट डेटा के उपयोग से तकनीक को और उन्नत बनाने की बात कही। परियोजना का प्रेजेंटेशन भी दिया
कमिश्नर खरना गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने की व्यवस्था देखी। परियोजना अधिकारियों ने बताया कि डेम से पाइपलाइन के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां उन्होंने पानी की सप्लाई को चालू और बंद करने की ऑटोमेटिक प्रणाली का भी निरीक्षण किया। इसके बाद वे लगदरिया पंप हाउस पहुंचे, जहां परियोजना का प्रेजेंटेशन दिया गया। साथ ही कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। 2.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही सिंचाई परियोजना प्रशासक विकास राजोरिया ने बताया कि मोहनपुरा-कुंडलिया परियोजना से राजगढ़ जिले में 2 लाख 30 हजार हेक्टेयर और आगर मालवा जिले में 63 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। आंकड़े देखने के बाद कमिश्नर ने संतोष जताया। उन्होंने बताया कि परियोजना में 72 मीटर ऊंचाई तक पानी लिफ्ट कर बीपीटी तक पहुंचाया जाता है, जहां से ग्रेविटी सिस्टम के जरिए किसानों को पानी उपलब्ध कराया जाता है। राजस्थान सीमा तक पानी पहुंचाने के लिए बूस्टर पंप लगाए गए हैं। एक ही स्थान से 33 क्यूमेक पानी लिफ्ट कर 25 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। डिमांड के अनुसार अपने आप चलते हैं पंप विकास राजोरिया ने बताया कि परियोजना में डिमांड और सप्लाई आधारित स्मार्ट नेटवर्क सिस्टम कार्य कर रहा है। यदि किसानों को कम पानी की आवश्यकता होती है तो पंप अपने आप बंद हो जाते हैं और मांग बढ़ने पर उनकी क्षमता स्वतः बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि कुंडलिया परियोजना में मोहनपुरा की तुलना में अधिक उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है। उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर निरीक्षण के दौरान उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। परियोजना प्रशासक ने सुझाव दिया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेहूं के साथ उद्यानिकी फसलों को भी प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए मोहनपुरा-कुंडलिया क्षेत्र को उद्यानिकी क्लस्टर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।



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