राजनांदगांव बाईपास सर्वे 10 माह बाद भी अधूरा:किसानों की जमीन खरीदी-बिक्री पर रोक, रियल एस्टेट को नुकसान
राजनांदगांव में नेशनल हाईवे बाईपास निर्माण का सर्वे 10 महीने बाद भी अधूरा है। इस लेटलतीफी के कारण दर्जनों गांवों के किसानों को परेशानी हो रही है, क्योंकि सर्वे के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नतीजतन, किसान अपनी निजी और पारिवारिक जरूरतों जैसे बच्चों की शादी, मकान निर्माण, ट्रैक्टर या वाहन खरीदी और खेती-किसानी के कार्यों के लिए भी अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी (PWD) के ईई सुनील कुमार चौरसिया और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह बाईपास लगभग 14 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी अनुमानित लागत अभी तय नहीं हुई है और फिलहाल अलाइनमेंट सर्वे की प्रक्रिया जारी है। राजनांदगांव एसडीएम गौतम पाटिल ने इस संबंध में बताया कि गठुला में बाईपास निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। विभाग द्वारा अलाइनमेंट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अलाइनमेंट फाइनल होते ही भू-अर्जन (भूमि अधिग्रहण) की कार्रवाई शुरू की जाएगी। पाटिल ने आश्वासन दिया कि सर्वे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सर्वे संपन्न होते ही जमीनों की खरीदी-बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटा दिया जाएगा। बाईपास निर्माण और उसके 1 किलोमीटर के दायरे में आने के कारण नवागांव, टोलगांव, बलहरी, गटुला, भेड़ीकला, पार्रीकला, सुंदरा और मनकी सहित दर्जनों गांवों की जमीनों की रजिस्ट्री रोक दी गई है। इन गांवों के किसान अब एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनकी मांग है कि या तो सर्वे का काम तेजी से पूरा कर मुआवजा दिया जाए, या फिर जमीन की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक तत्काल हटाई जाए। शहर को जाम से राहत देने के लिए बनेगा बाईपास राजनांदगांव शहर में बढ़ते ट्रैफिक और जाम की समस्या को कम करने के लिए पेढरी-मनकी बाईपास परियोजना प्रस्तावित की गई है। इस बाईपास के बनने से भारी वाहनों को शहर के अंदर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खैरागढ़ की ओर जाने वाले ट्रक और अन्य भारी वाहन शहर में प्रवेश करने से पहले ही बाईपास से गुजर सकेंगे। वहीं दुर्ग की तरफ से आने वाले वाहन मनकी से चिचोला और पेढरी से खैरागढ़ की ओर आसानी से जा सकेंगे। यह बाईपास राजनांदगांव-कवर्धा स्टेट हाईवे से जुड़ेगा। इसके लिए गटुला के पास एक प्रमुख चौराहा भी बनाया जाएगा। जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक से कारोबार प्रभावित बाईपास परियोजना के कारण लंबे समय से जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगी हुई है। इससे इलाके का रियल एस्टेट कारोबार प्रभावित हो रहा है। नए सौदे नहीं हो पा रहे हैं और कई पुराने सौदे भी रद्द करने पड़ रहे हैं। इसका असर जमीन कारोबार से जुड़े लोगों की आय पर पड़ रहा है। साथ ही रजिस्ट्री नहीं होने से सरकार को स्टाम्प ड्यूटी और अन्य करों के रूप में मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
Source link

