Supreme Court Warning to FSSAI
नई दिल्ली9 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे।
अदालत ने केंद्र सरकार से कहा-
पहले भी आपको सख्त न्यूट्रिशन वॉर्निंग को लेकर निर्देश दिए थे फिर आनाकानी क्यों । हमने जो कहा है, आपको करना चाहिए, क्या आप पर कॉर्पोरेट घरानों का दबाव है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जनता के हित में काम कर रहे हैं, अपने लिए नहीं। आपने अब तक क्या किया। 6 महीने पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और FSSAI से कहा था कि पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाने पर विचार किया जाए।
इस पूरे मामले को 8 सवाल-जवाब में समझें…
1. सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड वॉर्निंग लेबल को लेकर केंद्र सरकार से क्या कहा?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि यह मामला नागरिकों और विशेषकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए इस पर कोई भी निर्णय कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव में आकर नहीं लिया जाना चाहिए।
2. सवाल: कोर्ट में यह सुनवाई क्यों हुई और किसने याचिका दाखिल की थी?
जवाब: यह सुनवाई एक जनहित याचिका (PIL) पर हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि FSSAI की 7 मार्च की बैठक में लिए गए फैसले सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के विपरीत थे।
याचिकाकर्ता ने बताया कि FSSAI कंपनियों के विरोध को आधार बना रहा है, जबकि सिविल सोसाइटी के उन प्रमाणों को नजरअंदाज किया जा रहा है जो स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए वॉर्निंग लेबल के पक्ष में हैं।
3. सवाल: FSSAI और कंपनियों का इस वॉर्निंग लेबल पर क्या कहना है?
जवाब: FSSAI ने कोर्ट में बताया कि फूड इंडस्ट्री पैकेट के सामने वाले भाग पर वॉर्निंग लेबल लगाने के खिलाफ है। इसके विकल्प के रूप में FSSAI ने एक न्यूट्रिशन टेबल में एडेड शुगर, सैचुरेटेड फैट और दिन में कितना नमक लेना चाहिए यह दर्शाने का सुझाव दिया है।
कंपनियों का मानना है कि पैकेट के आगे लाल चेतावनी वाले निशान से उनके व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
4. सवाल: सरकार ने अपनी दलील में भारतीय खान-पान और नमकीन का क्या तर्क दिया?
जवाब: केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ब्रिजेंदर चाहर ने तर्क दिया कि पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों जैसे- नमकीन, भुजिया और स्नैक्स में स्वाभाविक रूप से नमक और वसा (फैट) का स्तर अधिक होता है। यदि विकसित देशों के मानक लागू किए गए तो कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों पर ‘रेड वॉर्निंग मार्क’ लग जाएगा।
5. सवाल: सरकार के ‘भारतीय नमकीन’ और विकसित देशों वाले तर्क पर कोर्ट ने क्या कहा?
जवाब: अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया- ‘क्या भारत को हमेशा एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए?’ कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार अपने नागरिकों और बच्चों का स्वास्थ्य सुनिश्चित नहीं करना चाहती? बेंच ने कहा कि निर्माता इसे पसंद न करें, लेकिन उपभोक्ता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह क्या खा रहा है।
6. सवाल: क्या इस तरह के वॉर्निंग लेबल लगने से पैक्ड फूड की बिक्री पर रोक लग जाएगी?
जवाब: नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वॉर्निंग लेबल का उद्देश्य बिक्री रोकना नहीं, बल्कि ग्राहक को जागरूक करना है। बेंच ने कहा कि निर्माता सोच सकते हैं कि इससे उनका बिजनेस प्रभावित होगा, लेकिन चेतावनी देखने के बाद अंतिम निर्णय ग्राहक का होगा कि वह उत्पाद खरीदना चाहता है या नहीं। इस विषय में निर्माताओं की भूमिका निर्णायक नहीं हो सकती।
7. सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को कितना समय दिया है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को वॉर्निंग लेबल प्रस्ताव का पालन करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कदम नहीं उठाए गए, तो अगली सुनवाई पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
8. सवाल: इस फैसले का आम उपभोक्ताओं और पैक्ड फूड इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: यदि ‘फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल’ लागू होता है, तो उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय ही पैकेट के सामने स्पष्ट दिख जाएगा कि उत्पाद में चीनी, नमक या फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक तो नहीं है। इससे लोग खान-पान के प्रति अधिक जागरूक होंगे और कंपनियों को भी अपने प्रोडक्ट्स के पोषण स्तर में सुधार करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल क्या होता है?
फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल यानी FoPL फूड आइटम्स के पैकेट के आगे वाले हिस्से पर लगने वाला एक सरल विजुअल सिंबल या रंगीन लेबल होता है। इसका उद्देश्य आम ग्राहक को आसानी से यह समझाना होता है कि प्रोडक्ट में साल्ट, शुगर या फैट का स्तर सुरक्षित सीमा से ज्यादा है।
रीडर टिप्स: पैक्ड स्नैक्स, बिस्किट या नमकीन खरीदते समय केवल ‘एमआरपी’ और ‘एक्सपायरी डेट’ न देखें। न्यूट्रिशन वैल्यू में सोडियम (नमक) और ‘एडेड शुगर’ की मात्रा पर ध्यान दें। यदि प्रतिदिन की आवश्यक सीमा से यह बहुत ज्यादा है, तो इसका सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
दुनिया के किन देशों में पहले से लागू है फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग
- दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ‘फ्रंट-ऑफ-पैक’ लेबलिंग को अनिवार्य किया है। इनमें चिली, मैक्सिको, ब्राजील, पेरू, उरुग्वे और इजरायल जैसे देश शामिल हैं, जहां पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी वाले लेबल लगाए जाते हैं।
- इन देशों में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि चेतावनी लेबल लगाने के बाद लोगों के खान-पान की आदतों में सुधार हुआ है। चिली जैसे देशों में, जहां यह सिस्टम सबसे पहले लागू किया गया था, वहां लोगों ने ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले प्रोडक्ट्स की खरीद कम कर दी है।
- इसके अलावा कंपनियों ने भी अपने प्रोडक्ट्स में चीनी और नमक की मात्रा को कम करना शुरू कर दिया है ताकि उनके प्रोडक्ट्स पर ‘अनहेल्दी’ होने का लेबल न लगे।
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