ग्वारीघाट के नाव चालकों पर आजीविका का संकट:जबलपुर नर्मदा नदी में घटते जलस्तर और पाबंदियों से बढ़ी मुश्किलें

ग्वारीघाट के नाव चालकों पर आजीविका का संकट:जबलपुर नर्मदा नदी में घटते जलस्तर और पाबंदियों से बढ़ी मुश्किलें




जबलपुर के ग्वारीघाट पर नर्मदा नदी का जलस्तर कम होने और प्रशासन की सख्त सुरक्षा व्यवस्था के चलते नाव चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कभी पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहने वाला ग्वारीघाट इन दिनों सूना नजर आ रहा है। अधिकांश नावें किनारे पर खड़ी हैं और नाविक कमाई के लिए परेशान हैं। नाव चालकों के लिए गर्मी का मौसम आमतौर पर सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले पर्यटक भी नौकाविहार का आनंद लेने पहुंचते हैं, जिससे नाव चालकों को अच्छी आय होती है, लेकिन इस साल नर्मदा का जलस्तर घटने के कारण लोग कई जगहों पर नाव के बजाय पैदल ही नदी पार कर रहे हैं, जिससे नौकाविहार की मांग कम हो गई है। सुरक्षा नियमों को और कड़ा कर दिया गया वहीं बरगी हादसे के बाद प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त पाबंदियों ने नाव चालकों की परेशानी और बढ़ा दी। हादसे के बाद जबलपुर के सभी घाटों पर करीब 22 दिनों तक नौकाविहार पूरी तरह बंद रहा। दोबारा संचालन की अनुमति मिलने के बाद सुरक्षा नियमों को और कड़ा कर दिया गया है। अब हर नाव चालक के लिए लाइफ जैकेट रखना अनिवार्य कर दिया गया है। नाव चालकों को यह व्यवस्था अपने खर्च पर करनी पड़ी है। नाव चालक पुरुषोत्तम बर्मन ने बताया कि उन्होंने 5,200 रुपए का कर्ज लेकर 6 लाइफ जैकेट खरीदी हैं, लेकिन कमाई नहीं होने से अब इसकी किस्त चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। बड़े त्योहारों पर भी नौकाविहार रोक देते हैं प्रशासन के नए नियमों के अनुसार एक नाव में अधिकतम 6 यात्रियों को ही बैठाने की अनुमति है। इसके अलावा सुरक्षा कारणों से रात 8 बजे के बाद नौकाविहार बंद कर दिया जाता है। बड़े त्योहारों और अधिक भीड़ वाले अवसरों पर भी नौकाविहार रोक दिया जाता है। नाव चालकों का कहना है कि पहले ही यात्रियों की संख्या कम हो गई है, ऊपर से सीमित कमाई में ठेकेदार को भी निर्धारित हिस्सेदारी देनी पड़ती है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। नाव चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि सुरक्षा नियमों के साथ उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए भी कोई राहत व्यवस्था की जाए।



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