Russia Azov Sea Shipping Halted

Russia Azov Sea Shipping Halted


मॉस्को5 घंटे पहले

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यूक्रेन ने पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया है।

यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है।

एजोव सागर लंबे समय तक यूक्रेन की पहुंच से बाहर रहा था। रूस इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले करने और दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, स्टील, सूरजमुखी का तेल और दूसरे सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने के लिए करता था। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेन के ड्रोन हमले काफी प्रभावी हो गए हैं और अब इस समुद्री रास्ते पर भी रूस का दबदबा कमजोर पड़ने लगा है।

यूक्रेन की ड्रोन सेना के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया गया है। पहले यूक्रेन के हमले मुख्य रूप से रूस के शैडो ऑयल टैंकरों और युद्धपोतों तक सीमित थे, लेकिन अब हमलों का दायरा बढ़ गया है।

रूस के दो अहम समुद्री रास्ते बंद

लगातार हमलों के बाद रूस ने डॉन-एजोव चैनल और केर्च स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोक दी है।

  • डॉन-एजोव चैनल एजोव सागर को रूस की अंदरूनी नदियों और जलमार्गों से जोड़ता है।
  • केर्च स्ट्रेट एजोव सागर को ब्लैक सी से जोड़ता है।

सैटेलाइट तस्वीरों और जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली बेवसाइट्स के मुताबिक, इन दोनों रास्तों के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर सिर्फ रूस के तेल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे गेहूं, सूरजमुखी के तेल और दूसरे कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लागू नहीं हैं।

अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) का कहना है कि यूक्रेन के हमलों का मकसद क्रीमिया को रूस की सप्लाई लाइन से अलग करना और समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व अनाज के निर्यात को बाधित करना है।

रूस में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।

रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है और वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 20% हिस्सा अकेले रूस से आता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।एजोव सागर में संकट बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के वायदा भाव (फ्यूचर्स) भी बढ़ने लगे हैं।

रूस का दावा है कि वह अपने गेहूं का निर्यात ब्लैक सी के दूसरे बंदरगाहों से कर सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि निर्यात के सबसे व्यस्त मौसम में दूसरे बंदरगाहों की क्षमता इतनी नहीं है कि वे पूरा भार संभाल सकें।

रूस के लिए एजोव सागर इतना खास क्यों है

एजोव सी यूक्रेन और रूस के बीच स्थित एक अंदरूनी समुद्र है, जो केर्च स्ट्रेट के जरिए ब्लैक सी से जुड़ा है। 2003 में यूक्रेन और रूस ने इस समुद्री क्षेत्र को साझा इस्तेमाल करने का समझौता किया था। लेकिन 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस ने इस समझौते का कई बार उल्लंघन किया।

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस ने एजोव सागर के आसपास के लगभग पूरे यूक्रेनी तट पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे रूस का समंदर तक बता दिया था।

आकार में छोटा होने के बावजूद, एजोव सागर रूस की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। सोवियत काल में विकसित हुए नदियों और नहरों का विशाल नेटवर्क इसी समुद्री मार्ग से जुड़ता है। इसके जरिए दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, सूरजमुखी का तेल, इस्पात और अन्य सामान पहले ब्लैक सी और फिर दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया जाता है।

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