विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा

विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा




फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराने के कुछ घंटों बाद अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप HMS मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया।

अर्जेंटीना ने इसे सैन्य घुसपैठ करार दिया। विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो ने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं ब्रिटेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यात्रा की जानकारी पहले ही अर्जेंटीना सरकार को दे दी गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंचने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर ‘लास माल्विनास सन अर्जेंटीना’ (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर लहराया। अर्जेंटीना में फॉकलैंड को माल्विनास कहा जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों का पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति ने इंग्लैंड को समुद्री लुटेरा कहा मैच से पहले अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने इंग्लैंड को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाले समुद्री लुटेरे तक कहा था। मैच जीतने के बाद उन्होंने खिलाड़ियों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। हमें स्टेडियम में यह बैनर ले जाने से रोका गया, लेकिन वे भूल गए कि माल्विनास हमारे खून और हमारे दिल में बसता है।” ब्रिटेन ने नाराजगी जताई, कहा- खेल में राजनीति न हो वहीं, ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी पीटर काइल ने खिलाड़ियों के बैनर को पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और फीफा को जांच करनी चाहिए कि कहीं खिलाड़ियों ने राजनीतिक संदेश देने संबंधी नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया। उन्होंने कहा, “राजनीति को फुटबॉल से दूर रहना चाहिए। आगे क्या कार्रवाई होगी, इसका फैसला अब फीफा करेगा।” फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में 44 साल से विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड पर ब्रिटेन का रुख क्या है ब्रिटेन ने दोहराया कि फॉकलैंड द्वीप के लोगों ने कई बार जनमत के जरिए ब्रिटिश क्षेत्र बने रहने की इच्छा जताई है। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा- ब्रिटेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। फॉकलैंड द्वीप के लोग ब्रिटिश हैं और अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार उन्हीं के पास है।



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