भारतमाला मुआवजा घोटाला…ED ने कुर्क की 12.78 करोड़ की संपत्ति:गांधी-तिवारी परिवार की संपत्ति पर एक्शन, डीड और परिवार को गिफ्ट के नाम पर बांटी गई जमीन
रायपुर-विशाखापट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भारतमाला परियोजना के तहत हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 12.78 करोड़ रुपए मूल्य की 62 चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) किया है। इनमें 4.69 करोड़ रुपए के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी शामिल हैं। इसके साथ ही जय प्रकाश गांधी समेत 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत (सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की गई है। रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्रमांक-17/2026 जारी किया गया। ईडी की जांच में सामने आया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद भूमि मालिकों, दलालों और राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर जमीनों का विभाजन कर अधिक मुआवजा हासिल करने की साजिश रची। गिफ्ट डीड के जरिए बढ़ाई पात्रता ईडी की जांच में सामने आया कि कई मामलों में बिक्री और गिफ्ट डीड के माध्यम से जमीन परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम कर दी गई। इसके बाद छोटे-छोटे हिस्सों में भूमि दिखाकर मुआवजे की पात्रता बढ़ाई गई और करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान लिया गया। एजेंसी के अनुसार इस पूरे खेल में राजस्व अधिकारियों और भूमि दलालों की सक्रिय भूमिका रही। EOW-ACB की FIR के बाद शुरू हुई जांच ईडी ने इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) छत्तीसगढ़ द्वारा 23 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी (CALA) अभनपुर निरभय साहू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। बाद में विशेष न्यायालय रायपुर में आरोप पत्र भी पेश किया गया। 56.76 लाख की पात्रता, मिला 9.83 करोड़ का मुआवजा जांच में ईडी ने पाया कि जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को वास्तविक पात्रता के अनुसार केवल 56.76 लाख रुपए का मुआवजा मिलना था, लेकिन उन्हें करीब 9.83 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह लगभग 9.27 करोड़ रुपए की कथित अवैध आय अर्जित की गई। इस राशि को अचल संपत्तियों, शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों के जरिए छिपाने का प्रयास उमा तिवारी पर भी करोड़ों का आरोप जांच में उगेतरा गांव की उमा तिवारी की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने खुद को मृत भूमि स्वामी की दत्तक पुत्री बताकर कथित फर्जी राजस्व अभिलेखों के आधार पर करीब 2.13 करोड़ रुपए का मुआवजा प्राप्त किया। वहीं ग्राम नायकबांधा के कई अन्य लाभार्थियों द्वारा भी जमीन के खसरों का विभाजन कर निर्धारित पात्रता से अधिक मुआवजा लेने की बात सामने आई है। पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई ईडी ने जय प्रकाश गांधी को 3 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को की गई छापेमारी में 49 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी और 89.80 लाख रुपए मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। इसके अलावा भूमि दलाल गिरोह की करीब 23.35 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं। अब तक 36.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क ईडी के मुताबिक ताजा कार्रवाई के बाद भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया।
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