दिल्ली जैसा रांची में छात्रों का आंदोलन,नेताओं की एंट्री बैन:10 दिनों से जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन, CJP का मिला साथ; अब हेमंत सरकार करेगी बात

दिल्ली जैसा रांची में छात्रों का आंदोलन,नेताओं की एंट्री बैन:10 दिनों से जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन, CJP का मिला साथ; अब हेमंत सरकार करेगी बात




झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम बीते 10 दिनों से छात्र आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। यहां छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन की तर्ज पर आंदोलन कर रहे हैं। ये छात्र झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं के में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए बीते 10 दिनों में इन्होंने मशाल जूलूस से लेकर कई तरह के तरीके अपनाए हैं। अब 10 दिनों के बाद राज्य सरकार इनके बात करने को तैयार हुई है। सरकार इसके लिए कमेटी बनाने का निर्णय ली है। यह कमेटी उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल की देखरेख में हाई लेवल की होगी। इस कमेटी में कुछ मंत्री, नेता और आईएएस अधिकारी भी होंगे। यह कमेटी जल्दी ही प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेगी। इसके लिए गृह विभाग या मंत्रिमंडल सचिवालय आज अधिसूचना जारी कर सकता है। छात्रों के आंदोलन की तस्वीरें देखें… छात्रों ने खुद का बना रखा है संविधान दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन की तर्ज पर यहां आंदोलन जरूर हो रहा है पर यह आंदोलन थोड़ा अलग है। बीते 10 दिनों में न तो छात्र उग्र हुए, न बयानबाजी हुई और न ही लाठीचार्ज की जरूरत पड़ी। इसकी वजह यह है कि छात्रों ने अपने इस आंदोलन से पॉलिटिकल पार्टियों की सीधी एंट्री बैन कर रखी है। इतना ही नहीं छात्रों ने अपने लिए खुद से एक कोड ऑफ कंडक्ट बना रखा है। इस कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक छात्र चार बातों पर ध्यान रखे हुए हैं। मंच से राजनीतिक, धार्मिक या जातिगत बयानबाजी पर रोक रहेगी। वक्ता केवल आंदोलन के मूल मुद्दों पर ही बोलेंगे। किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए जाएंगे और भाषण में अपशब्दों के प्रयोग से भी बचना होगा। इनका पालन आंदोलन के दौरान सख्ती से करने की अपील की गई है। गुजरात -दिल्ली से ऑनलाइन बुक हो रहा खाना जयपाल सिंह मुंडा में चल रहे छात्रों के धरना-सत्यग्रह आंदोलन को भारी जनसमर्थन मिलने लगा है। आंदोलनरत छात्रों को रहने, खाना-पानी के खर्च की चिंता थी, लेकिन अब वे बेफ्रिक हो गए हैं। क्योंकि, गुजरात-दिल्ली से छात्रों के लिए ऑनलाइन खाना बुक हो रहा है। डिलिवरी ब्वॉय लगातार खाना-पानी पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर चैती दुर्गा पूजा समिति की ओर से पिछले पांच दिनों से लगातार छात्रों को खाना खिलाया जा रहा है। दर्जनों संस्थाएं मदद कर रही हैं। ऐसे तय रखी है आंदोलन की रूपरेखा दरअसल छात्रों का यह आंदोलन नहीं बल्कि सत्याग्रह है। वैसे तो यह छात्र आंदोलन है, लेकिन जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच, आईसा और देवेंद्र महतो के नेतृत्व वाले अभ्यर्थी न्याय मंच ने अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए सरकार पर दबाव बनाया। इसी वजह से आंदोलन को अब राज्य के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी समर्थन मिलने लगा है। अलग-अलग छात्रों के मंच ने अपने कार्यक्रम की रूप रेखा भी तय कर रखी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के बैनर तले छात्र 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की घोषणा की है। वहीं आईसा के कार्यकर्ताओं ने आज सांस्कृतिक कार्यक्रम और 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। इसमें दिल्ली में आंदोलन का चेहरा रही आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल होंगी। भूख हड़ताल पर बैठे हैं देवेंद्रनाथ महतो जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के नेता देवेंद्र महतो ने लगातार तीसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखी। उनकी तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने की बात कही। उन्होंने घोषणा की कि आज की भूख हड़ताल दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन को समर्पित रहेगी। मंच ने 6 अगस्त को विधानसभा मार्च का आह्वान किया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और गुजरात सहित कई राज्यों से छात्रों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। अभ्यर्थियों की मांगें छात्र आंदोलन को मिला कोकरोच पार्टी का समर्थन जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलन पर बैठे छात्र छात्राओं के साथ कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बात की है। इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों को सुना और कहा कि छात्रों की हर मांग के साथ सीजेपी खड़ी है। छात्रों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण रूप से आंदोलन करते रहें। जीत छात्रों को होगी।



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