SEBI Closing Auction Session | Nifty Volatility & Market Manipulation
9 घंटे पहले
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शेयर बाजार में SEBI का नया नियम CAS लागू होने के बाद लगातार दूसरे दिन क्लोजिंग टाइम पर बड़ा उछाल आया। इस उछाल से रिटेल ट्रेडर्स के बीच काफी कंफ्यूजन पैदा हो गया है।
3 अगस्त को 3:15 बजे के बाद निफ्टी अचानक 185 अंक उछलकर 24,770 के पार बंद हुआ। ठीक वैसा ही वर्टिकल स्पाइक आज 4 अगस्त को भी दिखा। निफ्टी 24,465 से उछलकर 24,614 पर बंद हुआ।
इस स्टोरी में जानेंगे कि सेबी ने ये नियम लागू क्यों किया। इस नियम से आखिरी 15 मिनटों में बाजार में अचानक उछाल क्यों आ रहा है। रिटेल ट्रेडर्स को क्या सावधानियां रखनी चाहिए।
शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय करने का नया नियम
अब पुराने एवरेज फार्मूले के बजाय ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ यानी CAS के जरिए क्लोजिंग प्राइस निकाली जा रही। फेज-1 में यह नियम केवल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में शामिल शेयरों पर लागू किया गया है। अन्य साधारण शेयरों में ट्रेडिंग पहले की तरह ही 3:30 बजे तक चल रही है।
पहले कैसे तय होता था क्लोजिंग प्राइस?
3 अगस्त से पहले तक एक्सचेंज आखिरी 30 मिनट यानी दोपहर 3:00 से 3:30 बजे के ट्रेड्स का VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस निकालता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई आखिरी मिनट में छोटा ट्रेड करके शेयर की कीमत में हेरफेर न कर सके।
उदाहरण के लिए, अगर कोई शेयर पूरे दिन ₹1,000 से ₹1,010 के बीच ट्रेड हुआ और 3:29 बजे सिर्फ 1 शेयर का ट्रेड ₹980 पर हो गया, तो ₹980 को क्लोजिंग प्राइस नहीं माना जाता था।
क्या है नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन CAS?
अब VWAP की जगह CAS का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें आखिरी 30 मिनट के ट्रेड्स के एवरेज के बजाय, दिन के अंत में सभी बाय और सेल ऑर्डर्स एक जगह इकट्ठा किए जाते हैं। इसके बाद एक्सचेंज एक ऐसी सिंगल प्राइस तय करता है, जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों का सौदा हो सके।
F&O शेयरों के लिए आखिरी 30 मिनट का नया टाइमटेबल
- 3:00 से 3:15 बजे तक: नॉर्मल ट्रेडिंग। 15 मिनट के VWAP से एक ‘रेफरेंस प्राइस’ निकलती है।
- 3:15 से 3:20 बजे तक: FNO स्टॉक्स में रेगुलर ट्रेडिंग रुक जाती है और कोई नया ऑर्डर स्वीकार नहीं किया जाता। हालांकि, इन स्टॉक्स के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स शाम 3:40 बजे तक नॉर्मल ट्रेड होते हैं। ओपन ऑर्डर्स आगे कैरी फॉरवर्ड हो जाते हैं। इसमें स्टॉप-लॉस ऑर्डर्स, आइसबर्ग ऑर्डर्स और रेफरेंस प्राइस से 3% के बैंड (ऊपर या नीचे) के बाहर वाले ऑर्डर्स शामिल नहीं।
- 3:20 से 3:25 बजे तक (ऑर्डर एंट्री सेशन 1): मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर्स प्लेस कर सकते हैं। इस दौरान एक्सचेंज संभावित क्लोजिंग प्राइस, कुल बाय/सेल क्वांटिटी और मार्केट इम्बैलेंस (खरीदार ज्यादा हैं या बिकवाल) की जानकारी शेयर करता है।
- 3:25 से 3:30 बजे तक (ऑर्डर एंट्री सेशन 2): इस दौरान केवल लिमिट ऑर्डर्स ही प्लेस कर सकते हैं। मार्केट ऑर्डर्स को मॉडिफाई या कैंसिल नहीं किया जा सकता। यह सेशन शाम 3:28 से 3:30 बजे के बीच कभी भी रैंडमली बंद हो सकता है, ताकि आखिरी मिनट में ऑर्डर्स की भीड़ से बचा जा सके। इसके बाद, एक्सचेंज सबसे ज्यादा शेयर्स मैच होने वाली एक सिंगल प्राइस पर ऑर्डर्स मैच करता है, जो ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस बन जाती है।
- 3:30 से 3:35 बजे तक: यह समय क्लोजिंग ऑक्शन का वह चरण है जहां कोई नया ऑर्डर लिए बिना, सभी जमा ऑर्डर्स को ‘इक्विलिब्रियम प्राइस’ पर मैच किया जाता है। इसमें सबसे पहले मार्केट ऑर्डर्स और फिर ‘टाइम प्रायोरिटी’ के आधार पर लिमिट ऑर्डर्स मैच होते हैं; सौदे पूरे होते ही वही भाव ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस बन जाता है, जिससे 3:40 PM तक खुले ऑप्शन प्रीमियम में अचानक बड़े उछाल या गिरावट देखने को मिलते हैं।
उदाहरण से जानिए कैसे निकलती है फाइनल क्लोजिंग प्राइस
मान लीजिए ऑक्शन के दौरान मार्केट डेप्थ इस प्रकार है:
| प्राइस (₹) | क्युमुलेटिव बाय | क्युमुलेटिव सेल | एग्जीक्यूटेबल वॉल्यूम (मैच होने वाले शेयर) |
| 1,000 | 1,200 | 200 | 200 |
| 1,002 | 1,000 | 500 | 500 |
| 1,005 | 900 | 1,100 | 900 (अधिकतम) |
| 1,008 | 800 | 1,400 | 800 |
| 1,010 | 500 | 1,800 | 500 |
इस डेटा में ₹1,005 वह कीमत है, जिस पर सबसे ज्यादा (900 शेयर) ट्रेड हो सकते हैं। इसलिए ₹1,005 को ‘इक्विलिब्रियम प्राइस’ माना जाएगा और यही उस दिन की ऑफिशियल क्लोजिंग प्राइस बनेगी।
निवेशकों के लिए मुख्य बातें
- FNO स्टॉक्स में नॉर्मल ट्रेडिंग 3:15 PM पर बंद हो जाएगी, इसलिए इंट्राडे पोजीशंस पहले ही काट लें।
- ऑक्शन विंडो के दौरान प्राइस प्रेडिक्ट करना मुश्किल होगा, इसलिए नए सौदे लेने से बचें।
- ऑक्शन रिजल्ट आते ही ऑप्शन प्रीमियम में अचानक 200%-400% तक की स्पाइक आ सकती है।
अब कुछ जरूरी सवालों के जवाब
सवाल 1: निफ्टी में 3 अगस्त और 4 अगस्त दोनों दिन क्लोजिंग टाइम पर क्या दिखा?
जवाब: 3 अगस्त को पूरे दिन सीमित दायरे के बाद क्लोजिंग विंडो में निफ्टी 24,589 से सीधा 24,774 पर बंद हुआ (लगभग 185 अंक की तेजी)। वहीं 4 अगस्त को दिनभर गिरावट रहने के बाद 24,465 के निचले स्तर से आखिरी कैंडल में जबरदस्त खरीदारी की ऑक्शन मैचिंग हुई और निफ्टी +151.95 अंक (+0.62%) की बढ़त के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ।
सवाल 2: पुरानी क्लोजिंग प्रणाली में क्या कमी थी जिसे बदलने के लिए नया नियम लाना पड़ा?
जवाब: पुराने सिस्टम में दोपहर 3:00 से 3:30 बजे के आखिरी 30 मिनट के सौदों का वॉल्यूम-वेटेड एवरेज (VWAP) निकाला जाता था। इसमें कई बार बड़े ट्रेडर्स आखिरी सेकंड में छोटे वॉल्यूम के सौदे करके क्लोजिंग प्राइस को अपने हिसाब से मैनिप्युलेट कर लेते थे। नए ऑक्शन नियम में न्यूयॉर्क और लंदन की तर्ज पर सभी ऑर्डर्स को एक पूल में मैच करके पारदर्शी क्लोजिंग प्राइस निकाला जाता है।

