हिमाचल में IAS-IPS और IFS कैडर घटाने पर विवाद:पूर्व CS-ACS बोले- HAS-BDO, तहसीलदार की प्रमोशन पर असर पड़ेगा; कम ऑफिसर आईएएस में इंडक्ट होंगे
हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की कैडर स्ट्रेंथ कम करने के राज्य सरकार के फैसले पर दो पूर्व IAS ने सवाल उठाए है। पूर्व मुख्य सचिव एवं रिटायर आईएएस वीसी फारका और पूर्व एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी तरुण श्रीधर ने कहा कि कैडर स्ट्रेंथ कम होने का सीधा असर स्टेट सर्विस अधिकारियों (HAS) पर पड़ेगा। वहीं भाजपा ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए है। वर्तमान में आईएएस की टोटल कैडर स्ट्रेंथ के 33 फीसदी HAS की आईएएस में इंडक्शन होती है। ऐसे में कैडर स्ट्रेंथ कम होने से HAS की प्रमोशन प्रभावित होगी। कम HAS ऑफिसर आईएएस में इंडक्ट होंगे। तरुण श्रीधर ने कहा कि इससे तहसीलदार और बीडीओ तक प्रमोशन चैनल प्रभावित होगा। दोनों रिटायर अधिकारियों ने कहा कि आईएएस कैडर का रिव्यू सामान्य तौर पर हर पांच साल बाद होता है। इस प्रक्रिया में राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक जरूरत के हिसाब से सीनियर और जूनियर ड्यूटी पोस्ट की मांग करती है। इसी के आधार पर कैडर की समीक्षा और निर्धारण होता है। पूरी कैडर स्ट्रेंथ के अधिकारी कभी राज्य में तैनात नहीं रहे पूर्व मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि हिमाचल में कभी ऐसा नहीं रहा कि आईएएस कैडर की पूरी सेंक्शन स्ट्रेंथ के अधिकारी राज्य में ही तैनात रहे हों। बहुत सारे अफसर सेंटर डेपुटेशन पर रहते हैं। वर्तमान में भी होंगे। ऐसे में स्वीकृत कैडर स्ट्रेंथ और राज्य में वास्तव में उपलब्ध अधिकारियों की संख्या को अलग-अलग करके देखना जरूरी है। वेतन-भत्तों का खर्च केंद्र सरकार करती है रिइम्बर्स कैडर कम करने के पीछे राज्य सरकार के 200 करोड़ की बचत के तर्क पर भी वीसी फारका ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि आईएएस अधिकारियों के वेतन और भत्तों का खर्च भारत सरकार की ओर से रिइम्बर्स किया जाता है। हिमाचल सरकार ने केंद्र को भेजा कैडर कम करने का प्रस्ताव दरअसल, हिमाचल सरकार ने केंद्र को एक पत्र लिखा है। इसमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर को कम करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल को अधिकारियों की फौज की जरूरत नहीं है। अधिकारी जरूरत के मुताबिक होने चाहिएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आईएएस कैडर को 100 से 110 तक रखने की उनकी व्यक्तिगत इच्छा है, लेकिन फिलहाल 130 तक रखने का प्रस्ताव है। वर्तमान में राज्य में आईएएस की कैडर स्ट्रेंथ 153 है। वहीं आईएफएस की 118 की कैडर स्ट्रेंथ से इसे 83 करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसी तरह आईपीएस की स्ट्रेंत 96 करने कार प्रस्ताव भेजा गया है। सीएम ने कहा कि आईएएस की अधिक संख्या को देखते हुए वह किसी को भी सेंटर डेपुटेशन पर जाने से नहीं रोक रहे और केंद्र से मंजूरी मिलते ही रिलिव कर रहे हैं। जतना की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास: बीजेपी भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने कहा कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का कैडर घटाकर 200 करोड़ रुपए बचाने का सरकार का दावा जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं, वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फैसलों को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। जमवाल ने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि कई वरिष्ठ अधिकारी हिमाचल छोड़कर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर क्यों जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों में घुटन का माहौल और प्रशासनिक व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। सरकार को खर्च कम करने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अधिकारियों को स्वतंत्र माहौल देने पर ध्यान देना चाहिए।
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