MP में RI-पंचायत समन्वय अधिकारी को सब रजिस्ट्रार के पॉवर:स्वामित्व योजना में 50 लाख हितग्राहियों की मुफ्त रजिस्ट्री करेंगे, 17 से अभियान




मध्य प्रदेश में आबादी की जमीन पर काबिज स्वामित्व योजना के 50 लाख से ज्यादा हितग्राहियों को जमीन और आवास का मालिकाना हक देने के लिए सरकार 17 सितंबर से मुफ्त रजिस्ट्री शुरू करने जा रही है। इसके लिए राजस्व निरीक्षक, प्रभारी राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को भी सब रजिस्ट्रार के अधिकार दिए गए हैं। ये अधिकारी अपने निर्धारित क्षेत्र में हितग्राहियों की रजिस्ट्री कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से स्वामित्व योजना के हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री कर जमीन का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले योजना में 48.80 लाख हितग्राही चयनित थे, अब इनकी संख्या 50 लाख से अधिक बताई जा रही है। कैबिनेट करीब तीन महीने पहले ही इस फैसले को मंजूरी दे चुकी है। एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने हाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के सामने योजना का प्रजेंटेशन दिया था। इसमें रजिस्ट्री की गति बढ़ाने के लिए अधिकार प्राप्त हर अधिकारी-कर्मचारी को एक दिन में कम से कम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज रहेगा। RI को जिले में, पंचायत अफसरों को जनपद क्षेत्र में अधिकार वाणिज्यिक कर विभाग के नए नोटिफिकेशन के तहत राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत सब रजिस्ट्रार की शक्तियां दी गई हैं। ये अपने क्षेत्र के संबंधित जिलों में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कर सकेंगे। इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहायक विकास विस्तार अधिकारी और पंचायत समन्वय अधिकारी को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक पंजीयन घोषित किया गया है। वे भी स्वामित्व योजना के पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री कर सकेंगे। तहसीलदारों को पहले ही दिए जा चुके हैं अधिकार सरकार इससे पहले प्रदेश के सभी तहसीलदारों को भी स्वामित्व योजना की मुफ्त रजिस्ट्री के लिए सब रजिस्ट्रार के अधिकार दे चुकी है। अब नए नोटिफिकेशन से रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों की संख्या और बढ़ गई है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में हितग्राहियों की रजिस्ट्री जल्द पूरी करना है। पटवारी कर रहे विरोध, कानूनी विवाद में फंसने की आशंका योजना में रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के रूप में पटवारी का नाम दर्ज किए जाने का प्रदेश के पटवारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि भविष्य में रजिस्ट्री से जुड़े किसी कानूनी विवाद की स्थिति में पटवारी के बचाव की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। ऐसे मामलों में उन्हें अनावश्यक रूप से कानूनी दांव-पेंच में उलझना पड़ सकता है।



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