बिहार में ग्रीन एनर्जी में निवेश के बड़े मौके:ऊर्जा मंत्री ने निवेशकों को दिया भरोसा, बिजली क्षेत्र में ₹1.88 लाख करोड़ के निवेश की योजना




बिहार में ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। राज्य सरकार बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं पर करीब ₹1.88 लाख करोड़ के निवेश की योजना पर काम कर रही है। इसमें सोलर पावर, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। पटना के होटल ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट-2026’ में ऊर्जा क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया। समिट में उद्योग जगत, निवेशकों और उद्यमियों समेत करीब 200 से 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘बिहार-द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ रहा। ₹5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य समिट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संदेश में कहा गया कि बिहार सरकार ने नवंबर 2026 तक ₹5 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि राज्य में कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने, औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करने और जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर काम किया जा रहा है। समिट में ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, सोलर पार्क और बायोमास जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। 2,554 कृषि फीडर होंगे सोलराइज ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि बिहार में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। राज्य में बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अच्छे अवसर हैं। उन्होंने निवेशकों से बिहार में ऊर्जा और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत राज्य के 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत करीब 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इसके अलावा पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मिली मंजूरी ऊर्जा विभाग के सचिव-सह-अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि बिहार सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में सौर ऊर्जा, स्टोरेज, ट्रांसमिशन और बिजली उत्पादन से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की योजना महत्वपूर्ण है। इससे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज पर भी फोकस सेक्टोरल इन्वेस्टमेंट सेशन में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। राज्य में करीब 2.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही सोलर पार्क, बायोमास आधारित परियोजनाओं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य नए उद्योगों को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना है। निवेशकों ने उठाए कई मुद्दे ऊर्जा क्षेत्र के विशेष सत्र के बाद निवेशकों के साथ प्रश्नोत्तर और बी2जी (बिजनेस-टू-गवर्नमेंट) बैठक हुई। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी, पीएम-कुसुम-2.0, सौर ऊर्जा, स्टोरेज, न्यूक्लियर और थर्मल पावर, भूमि उपलब्धता, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और परियोजनाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं पर चर्चा हुई। बैठक में निवेशकों ने अपनी परियोजनाओं और निवेश से जुड़ी जरूरतों को अधिकारियों के सामने रखा। ऊर्जा विभाग की ओर से नीतिगत सहयोग और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। सेक्टरल सत्र में एनबीपीडीसीएल एवं ब्रेडा के एमडी राहुल कुमार, बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के एमडी नवल किशोर चौधरी और बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के एमडी विशाल राज समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



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