Election Commission Special Voter Revision Campaign


नई दिल्ली9 मिनट पहले

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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग विशेष अभियान चलाएगा। इसमें SIR के दौरान छूटे लोगों और 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

चुनाव आयोग ने यह निर्देश 29 सितंबर को लिखित रूप में दिया था। गुरुवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इसे दोहराया गया।

पहले और दूसरे फेज में 13 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं, तीसरे फेज में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेश में SIR प्रक्रिया जारी है। इनमें से 7 राज्यों में लिस्ट जारी हो चुकी है। हालांकि, EC ने तीसरे फेज के 7 राज्यों के नाम नहीं बताए हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा दो करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं।

हटाए गए नामों की भी जांच होगी

इसके अलावा आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। जरूरत के मुताबिक सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएंगे।

चुनाव आयोग SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना कराएगा, ताकि गलती से हटे पात्र मतदाताओं की पहचान हो सके।

BLO घर जाकर ऐसे लोगों की जांच करेंगे। डुप्लीकेट या मृत नहीं पाए जाने पर फॉर्म 6 के जरिए नाम दोबारा जोड़ा जाएगा। इसमें राजनीतिक दलों और बूथ लेवल एजेंटों की मदद भी ली जाएगी।

EC बोला- महाराष्ट्र में खास सावधानी बरतें

महाराष्ट्र में SIR अभी जारी है। यहां अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम जल्दबाजी में न हटाया जाए।

मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के अधिकारियों को पहले दस्तावेज और जानकारी की पूरी जांच करने के बाद ही नाम हटाने का फैसला लेने को कहा गया है। नोटिस पाने वालों के लिए 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे।

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें करीब 62.48 लाख मामले रिश्तेदारों की जानकारी में गड़बड़ी और करीब 59.75 लाख मामले पिछली मतदाता सूची में रिश्तेदार से मैपिंग न होने से जुड़े हैं।

चुनाव आयोग ने कहा है कि पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और उसका वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।

रिपोर्ट में दावा- दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने और SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया।

हालांकि, चुनाव आयोग ने बुधवार को SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में से अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया था। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी।

SIR प्रक्रिया के बारे में जानें…

10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR

चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।

पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

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