Chhattisgarh High Court Order | ESIC Staff Nurse Recruitment Merit List
बिलासपुर20 मिनट पहले
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ईएसआईसी में स्टाफ नर्स की नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने ESIC की स्टाफ नर्स भर्ती में चयनित अभ्यर्थी के नौकरी जॉइन नहीं करने पर मेरिट में अगले अभ्यर्थी को मौका नहीं देने को गलत माना है।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही ईएसआईसी को याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर दो महीने के भीतर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, ईएसआईसी ने 2019 में फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। स्टाफ नर्स के 17 पदों में एक पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित था। धमतरी की रहने वाली दीप्ति साहू ने इस पद के लिए आवेदन किया था।
मेरिट सूची में उनका नाम 18वें नंबर पर था। उन्हें 63.26 अंक मिले थे। ओबीसी वर्ग में उनसे ऊपर राखी पाल थीं, जिन्हें 66.03 अंक मिले थे और उनका चयन हो गया था।
जॉइन नहीं करने पर मेरिट के आधार पर दावेदारी
चयन के बाद राखी पाल ने 24 जुलाई 2019 को ईएसआईसी को नौकरी जॉइन नहीं करने की सूचना दी। इसके बाद दीप्ति ने मेरिट के आधार पर उस पद पर अपनी दावेदारी की। इसके बावजूद ईएसआईसी ने उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया।
दीप्ति ने पहले ईएसआईसी और फिर कैट में अपनी बात रखी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
25% रिजर्व सूची बनाने का था प्रावधान
हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़े 21 जून 2019 के प्रशासनिक निर्देशों का हवाला दिया। इनमें चयन सूची जारी होने के बाद 25% रिजर्व सूची तैयार करने का प्रावधान था। अगर कोई चयनित अभ्यर्थी नौकरी जॉइन नहीं करता या उसकी उम्मीदवारी रद्द होती है, तो चयन सूची में बदलाव कर रिजर्व सूची के अगले अभ्यर्थी को मौका दिया जाना था।
हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में वेटिंग लिस्ट का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद सक्षम अधिकारी के प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना जरूरी था। अधिकारियों ने इन निर्देशों के अनुसार रिजर्व सूची तैयार नहीं की।

