Avimukteshwaranand: अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय और गेरुआ पर कह दी अब तक की सबसे बड़ी बात!

Avimukteshwaranand: अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय और गेरुआ पर कह दी अब तक की सबसे बड़ी बात!


Swami Avimukteshwaranand: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले से वाराणसी आने के बाद भी चर्चा में बने हुए हैं. अब हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गेरुआ पहनने को लेकर मुद्दा उठाया और साथ ही ये भी मांग की कि सीएम अगले 40 दिन में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा दें. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो वे मुख्यमंत्री को नकली हिंदू’ घोषित करने को बाध्य होंगे.क्या आप जानते हैं सनातन धर्म में गाय माता और गेरुआ रंग का क्या महत्व है.

सनातन धर्म में गाय माता का महत्व

  • हिंदू धर्म के सभी वेद, पुराण और उपनिषद में गाय की महिमा का वर्णन किया गया है. माना जाता है की सभी 33 कोटि देवी – देवताओं का वास गाय में होता है. गाय की पूजा और सेवा से व्यक्ति के तमाम दोष दूर हो जाते हैं.
  • विष्णु पुराण में भी गाय की सेवा को मृत्यु के उपरांत मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया है.
  • मान्यता है की मृत्यु के बाद बैकुंठ का रास्ता व्यक्ति गाय की पूंछ पकड़ कर ही तय करता है.
  • भारतीय संस्कृति में गौ को धन भी कहा है. मान्यता है कि जब व्यक्ति गाय को पवित्र व शुभ मानकर उसकी सेवा करता है तो उसका मानसिक, आर्थिक और शारीरिक विकास होता है

भविष्य पुराण में गाय की महीमा

भविष्य पुराण के अनुसार गाय को माता यानी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. गौमाता के पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि नदियां, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र विराजित हैं.  

वेदों में गाय का महत्व

  • अर्थववेद के अनुसार धेनु सदानाम रईनाम अर्थात गाय समृद्धि का मूल स्त्रोत है. वह जननी है, समृद्धि के पोषण का स्त्रोत है. पुराणों के अनुसार गाय लाख योनियों का वो पड़ाव है जहां आत्मा विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू करती है.
  • ऋग्वेद में गाय को ऐसा जीव बताया है जो सौभाग्य कारक है. इसकी पूजा और सेवा अच्छा स्वास्थ, धन, समृद्धि मिलती है.

गेरुआ का महत्व

सनातन में गेरुआ रंग ज्ञान, शुद्धता और सेवा का प्रतीक है. ये आज्ञा चक्र का रंग है और आज्ञा ज्ञान-प्राप्ति का सूचक है. जो लोग आध्यात्मिक पथ पर होते हैं, वे उच्चतम चक्र तक पहुंचना चाहते हैं इसलिए वे इस रंग को पहनते हैं.

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