Childhood Diabetes: बच्चों में डायबिटीज पर सरकार का बड़ा कदम, फ्री स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी

Childhood Diabetes: बच्चों में डायबिटीज पर सरकार का बड़ा कदम, फ्री स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी


Symptoms Of Diabetes In Children: भारत में बच्चों की सेहत को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. देश में पहली बार बच्चों में डायबिटीज के इलाज और देखभाल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में पब्लिक हेल्थ सर्विस से जुड़े राष्ट्रीय सम्मेलन में गाइडेंस डॉक्यूमेंट ऑन डायबिटीज मेलिटस इन चिल्ड्रेन पेश किया. यह डॉक्यूमेंट बच्चों में डायबिटीज की पहचान, जांच, इलाज और लंबे समय तक देखभाल के लिए एक साफ और व्यवस्थित तरीका तय करता है. इससे पहली बार बच्चों की डायबिटीज देखभाल को देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम से जोड़ा गया है. 

भारत में डायबिटीज की समस्या

भारत में डायबिटीज पहले से ही एक बड़ी समस्या है. देश को अक्सर डायबिटीज की राजधानी भी कहा जाता है, जहां करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. अब बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाइप 1 डायबिटीज आमतौर पर बच्चों में देखने को मिलती है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है. इसके पीछे जेनेटिक कारण, इंफेक्शन और बेहतर पहचान जैसी वजहें हो सकती हैं, वहीं टाइप 2 डायबिटीज में खानपान, जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि की कमी बड़ी भूमिका निभाती है. 

गंभीर समस्याओं का कारण

अगर बच्चों में डायबिटीज का सही समय पर इलाज न हो, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. किडनी फेल होना, आंखों की रोशनी पर असर, दिल से जुड़ी बीमारी और कई मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है. 

पूरे देश में एक समान व्यवस्था 

नई गाइडलाइन के जरिए अब पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी. इसमें जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया है. स्कूलों और समुदाय स्तर पर शुरुआती पहचान की जाएगी. अगर किसी बच्चे में लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे जिला अस्पताल भेजा जाएगा, जहां सही इलाज शुरू किया जाएगा.

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सरकारी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज 

इस योजना की खास बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज मिलेगा. इसमें जरूरी जांच, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप और नियमित फॉलोअप शामिल हैं. इससे खासतौर पर गरीब परिवारों को राहत मिलेगी, क्योंकि डायबिटीज का इलाज लंबे समय तक चलता है और खर्च भी ज्यादा होता है. नई व्यवस्था में इलाज की पूरी प्रक्रिया को आपस में जोड़ा गया है, ताकि कहीं भी रुकावट न आए. गांव और स्कूल स्तर से शुरू होकर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक इलाज की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इससे बच्चों को लगातार देखभाल मिलती रहेगी, जो इस बीमारी में बहुत जरूरी है.

 4टी पर भी जोर 

जल्दी पहचान के लिए 4टी पर भी जोर दिया गया है. इसमें बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, लगातार थकान और अचानक वजन कम होना शामिल है. ये संकेत माता-पिता और शिक्षकों को समय रहते सतर्क कर सकते हैं. इसके साथ ही परिवार और देखभाल करने वालों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों की सही देखभाल कर सकें. इंसुलिन देना, शुगर की जांच करना और इमरजेंसी में क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाएगी.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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