elections in India are conducted freely and fairly and that EVM s deliver accurate results. | कर्नाटक सरकार की स्टडी में दावा: 91% लोग मानते हैं चुनाव निष्पक्ष; वोट चोरी के आरोपों पर भाजपा बोली- यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा
- Hindi News
- National
- Elections In India Are Conducted Freely And Fairly And That EVM S Deliver Accurate Results.
बेंगलुरु1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
राहुल गांधी ने 18 सितंबर, 2025 को ‘वोट चोरी’ के आरोप पर दूसरी बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी की स्टडी में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोगों मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और ईवीएम सटीक नतीजे देती हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) ने प्रकाशित की है।
यह सर्वे ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भाजपा पर कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ का लगातार आरोप लगा रहे हैं। वे कर्नाटक के कलबुर्गी में भी वोट चोरी का दावा कर चुके हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में भाजपा ने सर्वे रिपोर्ट को लेकर राहुल पर पलटवार किया है।
भाजपा नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘लोग चुनावों पर, ईवीएम पर और लोग भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। यह सर्वे कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा है। क्योंकि जहां नागरिक भरोसा दिखा रहे हैं, वहीं कांग्रेस शक जता रही है।’
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘राहुल गांधी का वोट चोरी और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को कर्नाटक में उनकी ही सरकार के सर्वे ने झूठा साबित कर दिया है।’ पूनावाला ने यह भी कहा कि बिहार में लगाए गए आरोपों को कांग्रेस के ही नेताओं तारिक अनवर और शकील अहमद खान ने नकार दिया था।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव को लेकर KMEA की रिपोर्ट अगस्त 2025 में तैयार हुई थी। हालांकि, यह रिपोर्ट हाल में सार्वजनिक की गई है। इसका टाइटल है ‘लोकसभा इलेक्शन 2024: इवैल्यूएशन ऑफ एंडलाइन सर्वे ऑफ नॉलेज, एप्टीट्यूड एंड प्रैक्टिस (KAP) ऑफ सिटीजन्स।’
यह स्टडी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की तरफ से लागू सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SVEEP) कार्यक्रम के नतीजों का आकलन करने के लिए कराया गया था।यह सर्वे कर्नाटक के 34 निर्वाचन जिलों के 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया।
इसमें ग्रामीण, शहरी और आरक्षित सीटों के कुल 5,100 मतदाता शामिल हुए। सर्वे में राज्य के चारों संभागों- बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु को कवर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी डिवीजनों में सर्वे में शामिल 91.31% लोगों ने माना कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं।
कुल मिलाकर 69.39% ने सहमति और 14.22% ने पूरी सहमति दी कि EVM सही नतीजे देती हैं। इसमें 6.76% ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने न्यूट्रल राय दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा भरोसा कलबुर्गी डिवीजन में दिखा। यहां 84.67% ने सहमति जताई और 10.19% ने पूरी तरह सहमति दी।
इसके बाद बेलगावी डिवीजन रहा, जहां 69.62% सहमत और 19.24% पूरी तरह सहमत थे। मैसूरु डिवीजन में भी भरोसा ज्यादा रहा, जहां 72.08% ने सहमति और 15.08% ने पूरी सहमति जताई। बेंगलुरु डिवीजन में पूरी सहमति का स्तर सबसे कम 7.17% रहा, हालांकि 67.11% लोग सहमत थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में न्यूट्रल राय देने वालों का अनुपात सबसे ज्यादा 12.50% रहा, जो अन्य डिवीजनों से अधिक है। असहमति भी बेंगलुरु डिवीजन में तुलनात्मक रूप से ज्यादा रही। यहां 9.67% ने असहमति और 3.56% ने पूरी असहमति जताई।
हालांकि, कलबुर्गी डिवीजन में असहमति का स्तर बहुत कम रहा। स्टडी के अनुसार, सभी डिवीजनों में बड़ी संख्या में लोग EVM पर भरोसा जताते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि EVM पर सबसे ज्यादा भरोसा कलबुर्गी डिवीजन में दिखा, जहां 83.24% सहमत और 11.24% पूरी तरह सहमत थे।
इसके बाद मैसूरु डिवीजन रहा, जहां 70.67% सहमत और 17.92% पूरी तरह सहमत थे। बेलगावी डिवीजन में भी भरोसा मजबूत रहा, जहां 63.90% सहमत और 21.43% पूरी तरह सहमत थे। बेंगलुरु डिवीजन में EVM को लेकर पूरी सहमति सबसे कम 9.28% रही, हालांकि 63.67% ने सहमति जताई।
यहां भी न्यूट्रल राय देने वालों का अनुपात सबसे ज्यादा 15.67% रहा, जो अन्य डिवीजनों की तुलना में काफी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल असहमति 8.75% रही। यह अनुपात बेलगावी और बेंगलुरु डिवीजनों में कलबुर्गी और मैसूरु की तुलना में थोड़ा ज्यादा पाया गया।
स्टडी में शामिल करीब 50% महिलाएं थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल पर कि क्या महिलाओं को मतदान से पहले पुरुष सदस्यों या बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए, डिवीजनों में राय अलग-अलग रही। कुल मिलाकर 34.57% ने इस विचार से सहमति और 3.14% ने पूरी सहमति जताई।
वहीं, इससे बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं ने असहमति (37.86%) या पूरी असहमति (13.78%) जताई। स्टडी में चुनावों में पैसे के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई। कुल 44.90% उत्तरदाताओं ने माना कि चुनावों में पैसे का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जबकि 4.65% ने इससे पूरी तरह सहमति जताई।
मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए लालच दिए जाने के सवाल पर 16.33% उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने ऐसी कोशिशों का अनुभव किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 833 उत्तरदाताओं में सबसे आम प्रलोभन सरकारी योजनाओं के लाभ रहे, जो कुल मामलों का 42.26% थे। इसके बाद नौकरी दिलाने के वादे रहे, जिनका हिस्सा 34.09% रहा।

