India Retail Inflation Data July 2026
21 मिनट पहले
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जुलाई 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर 4.4% पर स्थिर रहने की संभावना है। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोतरी के बावजूद महंगाई में यह स्थिरता रह जा सकती है। आज 12 अगस्त को शाम 4 बजे महंगाई के आंकड़े जारी होंगे।
फूड आइटम्स के दाम बढ़े, पर बेस इफेक्ट से मिली राहत
जुलाई में फूड आइटम्स महंगे हुए हैं। हालांकि, पिछले साल यानी जुलाई 2025 का बेस कम (1.6%) होने की वजह से इस बार कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर कुल महंगाई दर पर सीमित रह सकता है। इसी वजह से ओवरऑल महंगाई का आंकड़ा 4.4% के आसपास बना रहने की उम्मीद है।
RBI के 4% टारगेट से लगातार दूसरे महीने ऊपर
रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। अगर जुलाई का आंकड़ा अनुमान के मुताबिक 4.4% आता है, तो यह लगातार दूसरा महीना होगा जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की जाएगी।
महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।
4.40% महंगाई दर का क्या मतलब है?
1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)
जब हम कहते हैं कि जून 2026 में महंगाई 4.40% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जून 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.40% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:
किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.38% बढ़ गया।
2. ₹100 की चीज अब ₹104.40 की हो गई
इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जून 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान मई 2026 में ₹104.40 का हो गया है।

