Justice Ujjwal Bhuiyan Statement | Voting Rights Arbitrary Process
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नई दिल्ली51 मिनट पहले
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जस्टिस भुइयां NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के चांसलर भी रह चुके हैं। (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा- ऐसी कोई भी प्रक्रिया मनमानी है, जो लाखों भारतीयों को वोटिंग के अधिकार से रोकती है। इसे कोई भी बहाना सही नहीं ठहरा सकता है।
ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। उन्होंने कहा-
चाहे अरबपति हो या रिक्शा चलाने वाला हो। दोनों के वोट की कीमत बराबर होती है।
जस्टिस भुइयां रविवार को हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
जस्टिस भुइयां की स्पीच, 5 बड़ी बातें…
- भारत का संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता, जिसमें एक वर्ग को वोट देने का अधिकार हो और दूसरे को इससे रोका जाए।
- भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर वोटिंग से रोकने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगी।
- अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाती है, तो यह मनमानी है।
- ऐसी प्रक्रिया संविधान की बुनियाद पर चोट करती है। यह संवैधानिक व्यवस्था को नकारने के बराबर है।
- कोई भी संस्था या प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता, कोई भी अदालत इसे माफ नहीं कर सकती। कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।
लोकतंत्र में सर्वोच्च पद नागरिक का
जस्टिस भुइयां ने कहा, भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार, विदेशी शासन के खिलाफ भारत के लंबे संघर्ष से जुड़ा हुआ है। यह हमारी आजादी की अभिव्यक्ति है। अनुच्छेद 326 में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी जज जस्टिस फेलिक्स फ्रैंकफर्टर की टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सर्वोच्च पद नागरिक का होता है। मतदान के अधिकार के बिना एक नागरिक की कीमत ही क्या है।
जस्टिस भुइयां के बयान पर कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार पद छोड़ें कांग्रेस के प्रवक्ता जयराम रमेश ने X पर लिखा- जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित हो गया है कि CEC ने संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने और भी बहुत कुछ कहा है और CEC की पूरी तरह से पोल खोल दी है। ज्ञानेश कुमार ने पद पर बने रहने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है।
सुप्रीम कोर्ट SIR को सही ठहरा चुका
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में कहा था कि SIR यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच करना चुनाव आयोग के अधिकार में है और इस प्रक्रिया के तरीके जरूरत से ज्यादा नहीं हैं। अगर आयोग को लगे कि कोई व्यक्ति वोटर बनने की शर्तें पूरी नहीं करता, तो मामला संबंधित अथॉरिटी के पास भेजा जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। विपक्ष SIR को खतरनाक प्रक्रिया बता रहा है और ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए करीब 13 करोड़ नाम वापस जोड़ने की मांग कर रहा है।
विपक्ष ने चुनाव आयोग के अंदर SIR को लेकर मतभेद की खबरों पर भी सवाल उठाए हैं।
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