Nepal pm balen shah claims Nepal encroached on India’s land too

Nepal pm balen shah claims Nepal encroached on India’s land too


काठमांडू1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

बालेन शाह 5 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे। करीब 2 महीने बाद उन्होंने पहली बार 31 मई को संसद को संबोधित किया।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाली जमीन पर कब्जा नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है। अब दोनों देशों को मिलकर इस मामले की जांच करनी चाहिए।

बालेन पीएम बनने के 2 महीने बाद पहली बार नेपाली संसद को संबोधित कर रहे थे। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें इस बारे में जानकारी मिली।

उनके बयान को लेकर विपक्षी दल नाराज हो गए हैं। नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कई सांसदों ने मांग की कि यह बयान संसद की कार्यवाही से हटाया जाए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री या तो अपने दावे के समर्थन में सबूत दें या फिर बयान वापस लें।

इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि ‘सीमा-पार कब्जा’ से मतलब नो-मैन्स लैंड के उन इलाकों से है, जहां दोनों देशों के लोग रहकर खेती करते हैं।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

लिपुलेख मुद्दे पर ब्रिटेन से मध्यस्थता की अपील की

प्रधानमंत्री से भारत और चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के रास्ते होने वाले व्यापार को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत से निकाला जाएगा। नेपाल इस मुद्दे पर भारत को राजनयिक नोट भेज चुका है और भारत की ओर से जवाब भी मिल चुका है।

उनके मुताबिक जवाब में बताया गया है कि भारत और नेपाल इतिहासकारों, सर्वे विशेषज्ञों और इलाके की जानकारी रखने वाले जानकार लोगों की टीमें बनाएंगे। ये टीमें बातचीत के जरिए सीमा विवाद का समाधान खोजने की कोशिश करेंगी।

शाह ने कहा-

QuoteImage

हमने इस मुद्दे पर सिर्फ भारत और चीन से ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन सरकार से भी बात की है। हमारा मानना है कि ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि यह विवाद उस समय से जुड़ा है जब ब्रिटिश शासन इस इलाके को छोड़कर गया था।

QuoteImage

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी का मुद्दा नेपाल में लंबे समय से संवेदनशील माना जाता है। जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा मंजूर किया था, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है और यह स्वीकार्य नहीं है।

PM ने पहली बार संसद को संबोधित किया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को नेपाल की संसद को संबोधित किया है। इस साल मार्च में हुए चुनावों के बाद सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है, जब नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने संसद में अपनी बात रखी है।

दरअसल, विपक्षी दलों के सांसद लगातार मांग कर रहे थे कि प्रधानमंत्री संसद में आकर देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखें। इसके बाद बालेन शाह ने संसद को संबोधित किया और सांसदों के सवालों के जवाब दिए।

नेपाल में मार्च 2026 में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों में काफी बदलाव और असहजता देखी गई है।

4 घटनाएं जिसने भारत-नेपाल के रिश्ते पर असर डाला

1. लिपुलेख दर्रे से मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति: भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने के फैसले पर बालेन शाह प्रशासन ने सख्त आपत्ति जताई। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोहराया कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल का अभिन्न अंग हैं। पूरी खबर पढ़ें…

2. भारतीय विदेश सचिव को मिलने का समय न देना: मई 2026 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल के दौरे पर जाने वाले थे, ताकि वे प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता दे सकें। लेकिन पीएम बालेन शाह ने भारतीय विदेश सचिव को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण भारत को यह दौरा टालना पड़ा।

3. भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात न करना: नेपाल में जब भी कोई नई सरकार बनती है, तो परंपरा के अनुसार वहां के नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। हालांकि, बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग मिलने के बजाय सभी विदेशी राजदूतों से एक साथ (सामूहिक रूप से) मुलाकात की। इससे नई दिल्ली को यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष या पारंपरिक तरजीह नहीं देना चाहती।

4. पहले वर्ष कोई विदेशी दौरा न करने की नीति: नेपाल में आम तौर पर परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे अपने कार्यकाल के पहले वर्ष किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे।

प्रधानमंत्री के बयान से विवाद छिड़ा

भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने भी कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय जमीन पर अतिक्रमण का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने भी कभी आधिकारिक रूप से ऐसा मुद्दा नहीं उठाया है।

नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने भी शाह से माफी मांगने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान की आलोचना हो रही है। PM बालेन शाह का बयान नेपाल के भीतर ही बहस और विवाद का विषय बन गया है, जबकि भारत की ओर से अभी तक इस पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई दी

प्रधानमंत्री के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने कहा कि उनकी टिप्पणी का संबंध भारत की जमीन पर नेपाल के कब्जे से नहीं, बल्कि सीमा के कुछ इलाकों में मौजूद ‘क्रॉस बॉर्डर ऑक्युपेशन’ और ‘दसगजा’ से था।

दसगजा वह जमीन होती है जो भारत और नेपाल की सीमा के बीच छोड़ी जाती है। यह जमीन न भारत की मानी जाती है और न नेपाल की। इसका मकसद दोनों देशों के बीच साफ सीमा बनाए रखना होता है। आम तौर पर यह सीमा के दोनों तरफ कुछ मीटर चौड़ी पट्टी होती है।

भारत-नेपाल सीमा पर सीमा स्तंभों (पिलरों) के दोनों ओर लगभग 10-10 गज की खाली पट्टी छोड़ी जाती थी। यह जमीन सीमा की पहचान और रखरखाव के लिए रखी गई थी। इसी कारण इस पट्टी को दसगजा कहा जाने लगा।

समय के साथ दसगजा शब्द का इस्तेमाल सीमा के बीच की खाली पट्टी के लिए होने लगा, भले ही हर जगह इसकी वास्तविक चौड़ाई बिल्कुल 10 गज न हो। लेकिन कई जगहों पर लोगों ने इस खाली जमीन पर खेती शुरू कर दी, घर बना लिए या दूसरे काम करने लगे। इसे ही दसगजा पर अतिक्रमण कहा जाता है।

क्रॉस बॉर्डर ऑक्युपेशन का मतलब है कि सीमा के पास रहने वाले कुछ लोगों की जमीन एक देश में है, लेकिन उसका उपयोग दूसरे देश के लोग कर रहे हैं।

————————-

नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

नेपाली पीएम के 100 में से 88 वादे अधूरे:शपथ के 30 दिन में 2 मंत्रियों ने सरकार छोड़ी, जेन-जी बोले- क्या काबिल लोग नहीं

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता संभाले अभी सिर्फ दो महीने हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। बालेन ने 27 मार्च को शपथ लेने के बाद 100 पॉइंट सुधार एजेंडा लॉन्च किया था। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ट्रैकर वेबसाइट पर 88 वादे ओवरड्यू यानी तय समय से पीछे बताए जा रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!