Supreme Court Ruling: Police Cannot File FIR in PCPNDT Cases


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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि भ्रूण लिंग परीक्षण-PCPNDT एक्ट के तहत दर्ज मामलों की जांच पुलिस नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत नियुक्त अधिकारी ही कार्रवाई करेंगे।

प्री कॉन्सेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (पीसीपीएनडीटी) एक्ट का मकसद भ्रूण का लिंग पता लगाने के लिए प्रसव से पहले की जाने वाली जांच तकनीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट से जुड़े मामले तकनीकी होते हैं। इनमें मेडिकल जानकारी और संवेदनशीलता की जरूरत हो सकती है।

पुलिस की भूमिका सिर्फ सहायक की रहेगी

बेंच ने कहा, इस एक्ट के तहत जांच करने की जिम्मेदारी पुलिस की नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कानून के मुताबिक पुलिस सिर्फ सहायक के तौर पर मदद करेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रोक केवल PCPNDT एक्ट के तहत आने वाले अपराधों पर लागू होगी। यानी पुलिस सामान्य आपराधिक कानून में सामने आए मामलों की जांच और मुकदमा चला सकती है।
  • पुलिस सीधे तौर पर न तो FIR कर सकती है और न ही डॉक्टरों या अस्पतालों के खिलाफ एक्शन ले सकती है।
  • बेंच ने कहा की यह कानून मेडिकल नॉलेज से जुड़ा है, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की सहायता लेने से बचा जाना चाहिए।

स्पेशल अफसर के पास ही शिकायत और जांच का अधिकार

PCPNDT एक्ट की धारा 17(4) के तहत नियुक्त किए गए विशेष अधिकारी के पास ही इन अपराधों की शिकायत दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार होगा।

  • किसी भी अस्पताल या क्लिनिक में जाकर अचानक जांच करना, छापा मारना और रिकॉर्ड खंगालने का काम यही अधिकारी करेगा।
  • अगर कोई डॉक्टर अपराध में शामिल मिलता है, तो यह अधिकारी उसके क्लीनिक से अल्ट्रासाउंड मशीन, कंप्यूटर और मेडिकल रिकॉर्ड को जब्त कर सकता है।
  • दोषी पाए जाने वाले सेंटर का रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
  • आरोपी डॉक्टर/अस्पताल के खिलाफ केस रजिस्टर करने के लिए अफसर कोर्ट (मजिस्ट्रेट) के पास जाएगा न कि पुलिस स्टेशन।

प्री कॉन्सेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स-PCPNDT एक्ट क्या है

PCPNDT कानून का मकसद लिंग जांचने पर पूरी तरह रोक लगाना है। यह कानून देश में लगातार कम हो रही लड़कियों की संख्या और भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लाया गया था।

इसके तहत देश के हर क्लिनिक और लैब का सरकारी रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है जहां अल्ट्रासाउंड या जेनेटिक जांच की मशीनें होती हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसी मशीन रखना भी अपराध है।

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