इंदौर में अब 48 घंटे में मिलेगा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र:जोन कार्यालय से जारी होगा, मोबाइल पर आएगी PDF




इंदौर में अब आम लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बार-बार नगर निगम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई व्यवस्था के तहत जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित जोन कार्यालयों से जारी किए जाएंगे और नागरिकों को 48 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई है। निगम मुख्यालय से जारी होने वाले प्रमाण पत्र अब जोन क्रमांक 1 से 22 के माध्यम से जारी किए जाएंगे। सभी जोन कार्यालयों को आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिजन के मोबाइल नंबर पर मिलेगी PDF जोन क्षेत्र के निजी अस्पतालों और मुक्तिधाम/कब्रिस्तान से जन्म-मृत्यु की सूचना मिलते ही CRS पोर्टल पर उसकी प्रविष्टि और अनुमोदन की प्रक्रिया यथासंभव उसी दिन पूरी की जाएगी। अनुमोदन के बाद संबंधित परिजन के मोबाइल नंबर पर जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र की PDF भेजी जाएगी। इसके लिए जोन क्षेत्र के सभी निजी अस्पतालों को जन्म-मृत्यु से संबंधित डेटा प्रतिदिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएंगे। संबंधित कर्मचारियों को भी अस्पतालों से रोजाना जानकारी प्राप्त करनी होगी। ऑफलाइन आवेदन ऐसे करें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ऑफलाइन आवेदन मिलने पर उसे कार्यालय की आवक में दर्ज कर आवेदक को आवक क्रमांक और तारीख दी जाएगी। इसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर इंदौर 311 एप के माध्यम से आवेदन की ऑनलाइन प्रविष्टि करेगा। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में संशोधन के लिए प्राप्त आवेदनों के साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच कर यथासंभव 24 घंटे के भीतर आवश्यक सुधार किया जाएगा। सड़क किनारे पेड़-पौधों को कंक्रीट और पेवर ब्लॉक से करेंगे मुक्त पेड़-पौधों को नया जीवन देने के उद्देश्य से नगर निगम ने एक और पहल शुरू की है। इसके तहत सड़कों के किनारे लगे पेड़-पौधों के आसपास से कंक्रीट और पेवर ब्लॉक हटाकर पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध कराई जाएगी। पहले चरण के काम के लिए 21 लाख रुपए के टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। उद्यान विभाग प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि पेड़ों के आसपास कंक्रीट और पेवर ब्लॉक होने से बारिश और सिंचाई का पानी पर्याप्त मात्रा में जड़ों तक नहीं पहुंच पाता। नई व्यवस्था के तहत पेड़ों के आसपास आवश्यक जगह की कार्विंग कर कंक्रीट और पेवर ब्लॉक हटाए जाएंगे। इसके बाद प्रत्येक पेड़ के चारों ओर करीब एक-एक फीट का थाला विकसित किया जाएगा।



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