किशनगंज पेयजल परियोजना को 53.71 करोड़ की स्वीकृति:मंत्री दिलीप जायसवाल की पहल पर अमृत 2.0 के तहत मंजूरी
बिहार सरकार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की पहल पर किशनगंज शहर की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ी सौगात मिली है। केंद्र प्रायोजित अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत किशनगंज जलापूर्ति परियोजना के लिए 53 करोड़ 71 लाख 47 हजार 500 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना से शहर के हजारों परिवारों को नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य, नए बोरवेल का निर्माण परियोजना के अंतर्गत 3,892 नए गृह जल संयोजन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य सहित नए बोरवेल का निर्माण, पूर्व से स्थापित 10 बोरवेल का इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उन्नयन, 14 आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना और 7 पंप हाउस का निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त, 110 से 1,958 किलोलीटर क्षमता के पांच नए जलमीनार भी बनाए जाएंगे। योजना के तहत 100 से 600 मिमी व्यास का 720 मीटर क्लियर वाटर राइजिंग मेन तथा 110 से 250 मिमी व्यास का 178.21 किलोमीटर लंबा जल वितरण नेटवर्क भी बिछाया जाएगा। परियोजना से जुड़े अन्य आवश्यक निर्माण कार्य भी कराए जाएंगे, जिससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था अधिक आधुनिक, विश्वसनीय और प्रभावी बनेगी। अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृत इस परियोजना की कुल लागत 53.71 करोड़ रुपये है, जिसमें से 15.70 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 38.01 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। यह योजना भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुई है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, जल संरक्षण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है। कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बुडको को सौंपी तकनीकी समिति की 30 जून 2026 को आयोजित बैठक में इस परियोजना को अनुमोदन मिल चुका है। इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बुडको को सौंपी गई है, और सरकार के अनुसार योजना का क्रियान्वयन निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि इस परियोजना के धरातल पर उतरने से किशनगंज शहर में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्याओं का स्थायी समाधान मिलेगा। उन्होंने बताया कि आधुनिक जलापूर्ति अवसंरचना विकसित होने से हजारों परिवारों को स्वच्छ एवं नियमित पेयजल उपलब्ध होगा और शहर के समग्र शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी।
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