कैब-कंपनियां कन्फर्म बुकिंग के लिए एक्स्ट्रा पैसा नहीं मांग सकेंगी:सरकार बोली- एड ऑन और टिप जैसे ऑप्शन बंद करो, जल्दी बुकिंग के लिए मिलता है मैसेज
आप कैब सर्विस से राइड बुक करते हैं तो आपको एडवांस टिप या एड ऑन के नाम पर एक्स्ट्रा पैसे नहीं देने पड़ेंगे। सरकार ने बुधवार को रेपिडो, ओला, उबर और इनड्राइव जैसी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने मोबाइल एप्स से इस तरह के फीचर तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। परिवहन मंत्रालय ने कहा कि बुकिंग के समय ही ग्राहकों से एडवांस टिप वसूलना गलत है। सरकार के इस कदम से कैब बुक करने वाले करोड़ों यूजर्स को राहत मिलेगी, जिन्हें अक्सर पीक ऑवर्स में राइड बुकिंग के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। 9 सवालों में जानें आदेश क्यों, इससे क्या बदलाव होंगे और कस्टमर्स पर क्या असर पड़ेगा… सवाल 1: सरकार ने कैब एप्स को लेकर क्या नया निर्देश दिया है?
जवाब: केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने आदेश जारी कर सभी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने मोबाइल एप्स से बुकिंग के दौरान टिप मांगने वाले सभी प्रॉम्प्ट्स और ऑप्शंस को हटाने के लिए कहा है। सरकार ने कहा कि बुकिंग स्क्रीन पर टिप या एड-ऑन का विकल्प देना नियमों के खिलाफ है। सवाल 2: सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा, क्या शिकायतें थीं? जवाब: सरकार को लगातार ऐसी रिपोर्ट मिल रही थीं कि कैब कंपनियां अपनी एप्स पर “एडवांस टिप”, “एड-ऑन चुनें” और “जल्दी गाड़ी मिलने के चांस बढ़ाएं” जैसे मैसेज दिखा रही हैं। कुछ एप्स यात्रियों को यह भी कह रही थीं कि अगर वे टिप जोड़ेंगे, तो ड्राइवर के राइड स्वीकार करने की संभावना ज्यादा होगी। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत माना है। सवाल 3: मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के नियम इस बारे में क्या कहते हैं? जवाब: मंत्रालय ने गाइडलाइंस के एक खास नियम का हवाला दिया है, जिसके मुताबिक यात्रियों के पास यात्रा पूरी होने के बाद ही ड्राइवर को अपनी मर्जी से टिप देने का अधिकार है। यात्रा शुरू होने या बुकिंग के समय टिप का कोई प्रावधान नियमों में नहीं है। सवाल 4: क्या ड्राइवर को मिलने वाली टिप में से कैब कंपनियां अपना कमीशन काट सकती हैं? जवाब: नहीं। सरकार की गाइडलाइंस में कहा गया है कि टिप की 100% राशि सीधे ड्राइवर के खाते में क्रेडिट होनी चाहिए। कंपनियां इसमें से किसी भी तरह की कटौती नहीं कर सकतीं। सवाल 5: एडवांस टिप के मामले को सरकार ने किस कानून के तहत गलत माना? जवाब: एडवाइजरी के मुताबिक, एप में कोई भी ऐसा टिपिंग फीचर या मैकेनिज्म नहीं दिया जा सकता जो भ्रामक हो या ग्राहकों को प्रभावित करता हो। यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन है। सवाल 6: कंपनियों को एप में क्या बदलाव करने होंगे? जवाब: सरकार के आदेश के बाद अब कंपनियों को अपने मोबाइल एप्लिकेशन के इंटरफेस और बुकिंग एल्गोरिदम में बदलाव करना होगा। कंपनियों को बुकिंग स्क्रीन से एडवांस टिप के ऑप्शन हटाना पड़ेगा। अगर कंपनियां इस आदेश का पालन नहीं करती हैं, तो उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय की ओर से उन पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। सवाल 7: नए नियमों के बाद बुकिंग स्क्रीन पर क्या बदलाव दिखेगा? जवाब: मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सफर पूरा होने से पहले स्क्रीन पर कोई भी ऐसा प्रॉम्प्ट, मैसेज, ऐड-ऑन, पेमेंट ऑप्शन या यूजर इंटरफेस एलिमेंट नहीं दिखना चाहिए, जो डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से यह बताए कि एक्स्ट्रा पैसे देने से राइड जल्दी कंफर्म होने के चांसेस बढ़ेंगे, ड्राइवर जल्दी अलॉट होगा या वेटिंग टाइम कम हो जाएगा। सवाल 8: आम यात्रियों को सरकार के इस फैसले से क्या फायदा होगा? जवाब: पीक ऑवर्स और खराब मौसम के दौरान यात्रियों को जल्दी कैब बुकिंग के लिए यूजर को 10 से 100 रुपए तक एक्स्ट्रा देने पड़ते थे। सरकार के आदेश के बाद ऐसा नहीं होगा। सवाल 9: क्या अब राइड पूरी होने के बाद भी टिप नहीं दी जा सकेगी? जवाब: ग्राहक सफर खत्म होने के बाद ड्राइवर के व्यवहार और सर्विस के आधार पर मर्जी से टिप दे सकते हैं। सरकार ने सिर्फ बुकिंग के वक्त लगने वाली एडवांस टिप और एड ऑन पर रोक लगाई है, पोस्ट-राइड टिपिंग का विकल्प पहले की तरह रहेगा। ————————— ये भी पढ़ें… खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी, खाने-पीने की चीजें महंगी: जुलाई में 4.45% रही, दूसरे महीने RBI के 4% के अनुमान से ज्यादा आलू-प्याज जैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी है। जुलाई में यह 4.45% रही। एक महीने पहले जून में यह 4.38% पर थी। आज 12 अगस्त को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं। खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई है। जून में यह आंकड़ा 5.32% पर था।पूरी खबर पढ़ें…
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