कोटा में बीजेपी-कांग्रेस के मेयर के चेहरे ही हारे:बागी और निर्दलीयों ने समीकरण बिगाड़े; काग्रेस से बीजेपी में गई उम्मीदवार जीती
कोटा नगर निगम चुनाव में 97 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। वहीं, तीन बूथों पर फिर से मतदान होगा। नतीजों के अनुसार कोटा में बीजेपी का बोर्ड बना है। चुनाव में बीजेपी को 97 में से 55 सीट और कांग्रेस को 38 सीट मिली हैं। कांग्रेस के वो बडे़ चेहरे चुनाव हार गए, जिनका नाम मेयर के लिए चल रहा था। बीजेपी का भी एक चेहरा मेयर के लिए चर्चा में था, लेकिन चुनाव हार गया। बीजेपी और कांग्रेस अपनी ही पार्टी के रह चुके नेताओं से हार गई। आगे पढ़ें बीजेपी और कांग्रेस में मेयर पद के बड़े चेहरे कौन… रामगंजमंडी विधानसभा का वार्ड दो, देव बाई हारी चुनाव कांग्रेस से मेयर पद की दावेदार देव बाई गुर्जर चुनाव हार गई हैं। यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। इस वार्ड पर देव बाई के सामने बीजेपी की पारस कंवर चुनाव लड़ी थी। पारस को 2038 वोट मिले और देवबाई को 1448 वोट ही मिले। इस वार्ड में दौलतगंज निवासी निर्दलीय प्रत्याशी माया गुर्जर भी मैदान में थी। ऐसे में गुर्जर वोट कट गए। यहां गुर्जर वोटों में सेंधमारी और त्रिकोणीय मुकाबला फंसने से देव बाई चुनाव हार गई। कोटा दक्षिण से पूर्व पार्षद रही अनुभवी नेता हारी कोटा दक्षिण के वार्ड 57 में कांग्रेस ने पूर्व पार्षद और अनुभवी नेता अमोलक देवी को चुनाव मैदान में उतारा। उनका मुकाबला सुनीता सेन से था। सुनीता संघ समर्थित थीं। अमोलक कांग्रेस की दो बार पार्षद रह चुकीं है। वार्ड में सुनीता सेन को राष्ट्रीय सेविका समिति और संघ का पूरा सपोर्ट मिला। संघ कार्यकर्ताओं ने घर घर जाकर लोगों से बात की। ऐसे में यहां बीजेपी की जीत हुई। बीजेपी की सुनीता को यहां से 2024 वोट मिले और अमोलक देवी को 1975 वोट मिले। वार्ड 84 में कांग्रेस से बीजेपी में आई प्रत्याशी जीती वार्ड 84 में कांग्रेस प्रत्याशी सीमा यादव के सामने भाजपा की प्रमिला वर्मा ने चुनाव लड़ा। प्रमिला वर्मा पहले भी पार्षद रह चुकीं। पिछला चुनाव प्रमिला ने कांग्रेस से लड़ा था। इस बार भाजपा में शामिल होने के बाद चुनाव लड़ा। ऐसे में इस वार्ड में कांग्रेस के पारंपरिक वोट, पार्टी और चेहरे के बीच फंस गए। ऐसे में प्रमिला यहां से चुनाव जीतने में सफल रही। अब प्रमिला बीजेपी के मेयर चेहरे की दौड़ में है। यहां सीमा को 1310 वोट मिले, जबकि प्रमिला को 1550 वोट मिले। वार्ड 71 में बागी होकर चुनाव लड़वाया, दोनों पार्टी प्रत्याशी हारे वार्ड 71 में त्रिकोणीय मुकाबला रहा। यहां से कांग्रेस की प्रत्याशी सविता सुवालका मेयर पद के दावेदार थी। पति राजेन्द्र सुवालका पूर्व पार्षद रह चुके हैं। यहां पर भाजपा ने मीनाक्षी सेन को मैदान में उतारा था। लेकिन भाजपा से बागी होकर अजय चौधरी ने पत्नी वंदना को निर्दलीय मैदान में उतारा। यहां समीकरण बिगड़ गए और दोनों ही पार्टी प्रत्याशी हार गए। त्रिकोणीय मुकाबला होने के चलते और बूथ स्तर पर मेहनत के चलते वंदना फौजदार जीत गई। यहां वंदना को 1264 वोट मिले जबकि रनरअप बीजेपी की मीनाक्षी को 1097 वोट मिले। वार्ड 77 में निर्दलीय ने बीजेपी फेस को हराया वार्ड 77 में बीजेपी ने दीपा आर्य को चुनावी मैदान में उतारा था। उनका नाम मेयर पद के दावेदारों के लिए चर्चा में था। यहां कांग्रेस की शकीला चुनाव लड़ रही थीं। रानी जुबेर ने निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में आकर बाजी पलट दी। रानी जुबेर ने कांग्रेस से टिकट मांगा था, नहीं मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़ा। मुकाबले में कांग्रेस को तीसरे नंबर पर खिसका दिया और मुकाबला दीपा और रानी के बीच रह गया। चुनाव में निर्दलीय रानी ने जीत हासिल की है। रानी को 2424 वोट मिले हैं जबकि दीपा को 2317 वोट मिले।
Source link

