दरभंगा के डायल 112 के जवान की भागलपुर में मौत:नक्सली हमले में पिता हुए थे शहीद, अनुकंपा पर मिली थी नौकरी; परिजन ने अनहोनी की आशंका जताई

दरभंगा के डायल 112 के जवान की भागलपुर में मौत:नक्सली हमले में पिता हुए थे शहीद, अनुकंपा पर मिली थी नौकरी; परिजन ने अनहोनी की आशंका जताई




भागलपुर के सबौर थाने में तैनात डायल 112 के पीटीसी जवान की मौत हो गई। रविवार रात सोने के बाद वह जगे ही नहीं। वे खर्राटा लेते थे। कमरे में उनके साथी जवान ने जब खर्राटे की आवाज नहीं सुनी तो उन्हें हिलाया पर शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद उन्हें मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जवान आलोक रंजन (31) दरभंगा के बहादुरपुर स्थित मनेरा गांव के रहने वाले थे। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर सोमवार की शाम दरभंगा से परिजन पहुंचे। परिजनों ने किसी अनहोनी की आशंका जताई है। मामा अर्जुन ने बताया कि मामले की जांच होनी चाहिए। आलोक को कोई बीमारी नहीं थी। शारीरिक रूप से वह काफी मजबूत था। सिटी एसपी शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि जवान की मौत की जानकारी मिली है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसके बारे में पता चलेगा। जहां जवान मृत हालत में पड़े थे, वहां जांच के लिए एफएसएल की टीम भी पहुंची थी। शाम में अनजान शख्स के साथ लौटे थे रविवार की शाम करीब साढ़े आठ बजे आलोक किसी अनजान शख्स के साथ लौटे थे। बेसुध हालत में वे मकान की सीढ़ी के पास पड़े थे। साथी की मदद से उन्हें कमरे में सुला दिया गया। आलोक ने रात में खाना भी नहीं खाया था। रविवार को वे ड्यूटी पर भी नहीं गए थे। पत्नी रुणा देवी से रविवार दोपहर के बाद बात भी नहीं हुई। रात में पत्नी ने कई बार कॉल किया, लेकिन आलोक से संपर्क नहीं हो पाया। सोमवार सुबह करीब 6 बजे परिजन को घटना की जानकारी मिली। शरीर पर खरोंच के निशान थे आलोक के किराए के मकान में साथ रहने वाले यूसुफ ने बताया कि मैं और आलोक रंजन थाना के बगल में किराए के मकान में एक साथ रहते थे। रविवार रात आलोक बिना खाना खाए ही सो गया। अक्सर वह सोने के दौरान खर्राटा लेता था। रात करीब तीन बजे जब मैं जगा तो वह खर्राटे नहीं ले रहा था। पास जाकर देखा तो उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। मैंने उसी मकान में रहने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक देवव्रत को बुलाया और थाने को जानकारी दी। उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। आलोक के पिता माधुरी राम सिपाही थे। वर्ष 2007 में रोहतास में नक्सली हमले में वह शहीद हो गए थे। इसके बाद अनुकंपा के आधारपर साल 2015 में आलोक को नौकरी मिली थी। आलोक एक साल से भागलपुर में तैनात थे। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर ही थी। घर में पत्नी के अलावा दो बहनें हैं। दोनों अविवाहित हैं। आलोक को दो बेटियां हैं, जिनमें एक तीन जबकि दूसरी एक साल से छोटी है। ये हो सकते हैं मौत के कारण मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉक्टर हेमशंकर शर्मा ने आलोक की मौत को लेकर दो संभावित कारण बताए। 1- अगर उम्र के अनुसार ज्यादा वजन है तो स्लिप एप्निया की बीमारी से कई बार लोगों की मौत हो जाती है। इसमें खर्राटा ज्यादा आता है और सांस की गति रुक जाती है।
2- अगर वजन ज्यादा नहीं और उम्र कम है, इसके बाद भी खर्राटे आते हैं और नींद में ही मौत हो जाती है तो कार्डियोमायोपैथी बीमारी मानी जाती है। इसमें एक से तीन मिनट के अंदर अचानक हार्ट बंद हो जाता है।



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