दिनकर हिन्दी साहित्य के दैदीप्यमान सूर्य थे : डॉ. शशि भूषण
भास्कर न्यूज | समस्तीपुर
समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर में शुक्रवार को साहित्य और इतिहास के दो महान व्यक्तित्वों को याद करते हुए अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 52वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, वहीं इतिहास विभाग ने ‘विजय दिवस’ के रूप में वीर कुंवर सिंह को याद किया। हिन्दी विभाग के कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ‘शशि’ ने की। कार्यक्रम की शुरुआत दिनकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।प्रधानाचार्य ने कहा कि दिनकर हिन्दी साहित्य के देदीप्यमान सूर्य थे, जिनकी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना, देशभक्ति और वीर रस की प्रधानता स्पष्ट रूप से झलकती है। उन्होंने शोषितों के पक्ष में मुखर स्वर उठाया और साहित्य के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य किया।हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार चौधरी ने कहा कि हिन्दी साहित्य जगत दिनकर का सदैव ऋणी रहेगा। उनकी रचनाएं ओज, ज्ञान और मानवता का अनुपम स्रोत हैं।सहायक प्राध्यापिका डॉ. अपराजिता राय ने उनके साहित्य में भारतीय संस्कृति, परंपरा और इतिहास के समन्वय को रेखांकित किया। वहीं डॉ. एस.एम.ए.एस. रज़ी ने कहा कि दिनकर की लेखनी ने देश में एकता और अखंडता को मजबूत करने का कार्य किया।कार्यक्रम में डॉ. दयानंद मेहता, डॉ. देवकांत, डॉ. दिनेश्वर राय, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. श्वेता दुबे सहित कई शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं स्नातकोत्तर इतिहास विभाग द्वारा ‘विजय दिवस’ के रूप में वीर कुंवर सिंह को याद किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि से हुआ।इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. दयानंद मेहता ने कहा कि 80 वर्ष की आयु में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ तलवार उठाना इतिहास की असाधारण घटना है। यह दिवस हमें संघर्ष और साहस की प्रेरणा देता है।डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध पद्धति अपनाई थी। डॉ. दिनेश्वर राय ने कहा कि 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव के प्रयास से आरा में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि यदि कुंवर सिंह की उम्र कम होती तो देश 1857 में ही आजाद हो सकता था।अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम इतिहास पुरुषों को समझने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करते हैं।कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रोहित प्रकाश ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं
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