नक्सल का रास्ता छोड़ युवा बने आत्मनिर्भर:ई-रिक्शा से कमा रहे रोजी-रोटी, कलेक्टर, एसपी और डीआईजी सीआरपीएफ ने की ई-रिक्शे की सवारी

नक्सल का रास्ता छोड़ युवा बने आत्मनिर्भर:ई-रिक्शा से कमा रहे रोजी-रोटी, कलेक्टर, एसपी और डीआईजी सीआरपीएफ ने की ई-रिक्शे की सवारी




कभी घने जंगलों में हथियार लेकर हिंसा की राह पर चलने वाले तीन युवा पोडियाम राजू, मनीष लखमा और कलमू कोसा अब सुकमा की सड़कों पर एक नई और सकारात्मक जिंदगी जी रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की “नक्सल पुनर्वास नीति 2025” के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद जिला प्रशासन ने इन तीनों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया है। अब ये युवा सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका कमा रहे हैं और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर अमित कुमार, एसपी किरण चव्हाण और सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित ने खुद इनके ई-रिक्शा में सफर किया और उनका हौसला बढ़ाया। अधिकारियों के साथ बैठकर इन्हें यह महसूस हुआ कि अब वे समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। यह बदलाव राज्य और केंद्र सरकार की पुनर्वास नीति का नतीजा बताया जा रहा है। इस योजना के तहत ऐसे युवाओं को सिर्फ आत्मसमर्पण ही नहीं, बल्कि आगे की जिंदगी के लिए ट्रेनिंग और रोजगार का भी पूरा सहारा दिया जा रहा है। प्रशासन ने इन तीनों को वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया और फिर उन्हें ई-रिक्शा भी उपलब्ध कराया, ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें। आज ये युवा न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बन रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी मिसाल बन गए हैं। सुकमा प्रशासन का यह प्रयास यह दिखाता है कि सही दिशा और मौके मिलें तो भटके हुए रास्ते पर गए लोग भी मुख्यधारा में लौटकर बेहतर जिंदगी जी सकते हैं।



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