पंडित प्रदीप मिश्रा कथा विवाद में नया मोड़:पूर्व आयोजक सतीश कुमार ने की पीसी, बोले- 27 लाख दिए, पेमेंट नहीं देते तो कथा रद्द करने की दी जाती थी चेतावनी

पंडित प्रदीप मिश्रा कथा विवाद में नया मोड़:पूर्व आयोजक सतीश कुमार ने की पीसी, बोले- 27 लाख दिए, पेमेंट नहीं देते तो कथा रद्द करने की दी जाती थी चेतावनी




करनाल के घरौड़ा में पंडित प्रदीप मिश्रा की चल रही शिव महापुराण कथा को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कथा के पूर्व मुख्य आयोजक सतीश कुमार कैमरे के सामने आए और अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने दावा किया कि उनकी संस्था ने ही कथा बुक करवाई थी और इसके लिए लाखों रुपए की पेमेंट की गई, जबकि उन पर लगाए गए पास बेचने जैसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। यम दृष्टि फाउंडेशन के संकल्प से शुरू हुई पहल
सतीश कुमार ने बताया कि यम दृष्टि फाउंडेशन के मुखिया दंडी स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के संकल्प के तहत घरौंडा में कथा करवाने की योजना बनी थी। इस धार्मिक आयोजन में उनकी संस्था विवेकानंद चाइल्ड सोशल वेल्फेयर सोसायटी भी शामिल हुई। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था सेवा भाव से काम कर रही थी, लेकिन बाद में उन पर झूठे आरोप लगाए गए। 21 फरवरी को सिहोर जाकर बुक करवाई कथा
सतीश कुमार के अनुसार उनकी टीम 21 फरवरी को सिहोर गई थी, जहां पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा बुक करवाई गई। शुरुआत में वहां की मैनेजमेंट ने 2028 तक कोई तारीख खाली नहीं होने की बात कही थी, लेकिन बाद में उनकी टीम के संपर्क में आए लोगों ने दो दिन बाद कॉल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और कथा तय हो गई। पेमेंट के लिए बार-बार बनाया गया दबाव
सतीश कुमार ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली के रोहिणी में कथा चल रही थी, उसी दौरान से सिहोर की तरफ से लगातार पेमेंट के लिए दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर समय पर पैसे नहीं दिए जाते थे तो कथा रद्द करने की चेतावनी दी जाती थी। यहां तक कहा गया कि उसी शाम पंडित प्रदीप मिश्रा ऑनलाइन आकर कथा कैंसिल कर देंगे। 27 लाख रुपए किए ट्रांसफर, 50 बार आए कॉल
सतीश कुमार ने बताया कि 26 फरवरी को श्री विठ्ठलेस सेवा समिति के अकाउंट में 2 लाख रुपए आरटीजीएस किए गए। इसके बाद 13 अप्रैल को 25 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। कुल मिलाकर उनकी सोसायटी के अकाउंट से 27 लाख रुपए भेजे गए। उन्होंने कहा कि रविंद्र नायक और समीर शुक्ला से उनकी लगातार बात होती रही और जितनी राशि मांगी गई, उतनी ही उन्होंने दी। उनका दावा है कि जब तक पेमेंट नहीं की गई, तब तक कथा की घोषणा नहीं की गई और पैसों के लिए करीब 50 बार कॉल किए गए। 14 मई को विवाद के दौरान कूदने से टूटे दोनों पैर
सतीश कुमार ने 14 मई की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस दिन घरौंडा में कथा को लेकर विवाद हुआ था और भीड़ काफी बढ़ गई थी। इस दौरान संजय गोयल ने उन्हें पीछे के रास्ते से निकलने के लिए कहा। जब पीछे का दरवाजा नहीं खुला तो वह सीढ़ियों पर चढ़े और वहां से नीचे कूद गए, जिससे उनके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए। इसके बाद वह चुप रहे, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने अपनी बात सामने रखी। पंडित प्रदीप मिश्रा के बयान पर उठाए सवाल
वीरवार शाम को पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा दी गई सफाई पर सतीश कुमार ने कहा कि उनका पंडित मिश्रा के साथ कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं था और न ही कोई फॉर्म भरा गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें भी गुमराह किया जा रहा है और उनकी बात पंडित मिश्रा तक पहुंचाई जाए। पास बेचने के आरोपों को बताया बेबुनियाद
सतीश कुमार ने कहा कि उनकी संस्था पर पास बेचने के आरोप लगाए गए, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास कोई सबूत है तो सामने लाए। उन्होंने यह भी कहा कि पानीपत के लोगों पर भी बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। 35 से 40 लाख तक का खर्च, पैसे वापसी की मांग
सतीश कुमार ने बताया कि कथा की बुकिंग और अन्य तैयारियों में करीब 35 से 40 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। उन्होंने नई कमेटी से अपने खर्च किए गए पैसे वापस करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो पैसा उन्होंने लगाया है, वह लौटाया जाए। इस पैसे में से वे अपनी इच्छा के अनुसार एक या दो लाख रुपए भी दान करेंगे, क्योंकि यह एक पुनीत कार्य है। मंडी के लोगों को नहीं थी जानकारी
उन्होंने यह भी कहा कि मंडी के लोगों को इस कथा के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी कि यह कैसे शुरू हुई और इसके लिए कितनी मेहनत की गई। उन्होंने मीडिया के जरिए अपनी बात सभी तक पहुंचाने की अपील की। चार प्वाइंट में पंडित प्रदीप मिश्रा की मुख्य बातें, जो प्रेस कांफ्रेंस में बोली थी
कथा को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार अहम बातें कही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथा के लिए कोई तय फीस नहीं होती और 1.21 करोड़ या 71 लाख जैसी रकम फिक्स नहीं होती। आयोजक अपनी क्षमता के अनुसार योगदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथा में न तो वीआईपी पास बनाए जाते हैं और न ही बेचे जाते हैं, साथ ही किसी प्रकार का चंदा भी नहीं लिया जाता। दान और झोली को लेकर उन्होंने बताया कि श्रद्धालु स्वेच्छा से जो भी अर्पित करते हैं, वह समिति के कार्यालय में जमा होता है। आयोजन की जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने कहा कि साउंड सिस्टम, भंडारा और पानी जैसी व्यवस्थाएं आयोजकों की होती हैं और उनकी टीम केवल सहयोग करती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!