बहन ने राखी बांधी, रो पड़ा जेल में बंद भाई:भावुक हुई बहन बोली- भगवान से यही दुआ, जल्द घर लौट आए मेरा भाई
अजमेर सेंट्रल जेल में शुक्रवार सुबह बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। जेल के मुख्य गेट के पास मुलाकात की खास व्यवस्था की गई थी। जैसे ही बहन सामने आई और भाई की कलाई आगे बढ़ी, भावनाएं छलक पड़ीं। जेल में बंद भाई रोने लगा। बहन भी भावुक हो गई। किसी ने राखी बांधी, किसी ने मिठाई खिलाई तो किसी ने कुछ पल भाई से बात कर मन हल्का किया। ‘12 महीने से अंदर है भाई… बस घर लौटने का इंतजार’ अपने भाई को राखी बांधने पहुंची उर्मिला की आंखें नम दिखीं। उर्मिला ने कहा कि मेरा भाई पिछले 12 महीने से जेल में बंद है। रक्षाबंधन के दिन भाई का घर पर नहीं होना सबसे ज्यादा खल रहा है। उर्मिला ने कहा- आज का दिन बहुत दुख दे रहा है। भाई घर पर होता तो अलग ही खुशी होती। यहां तो बस कुछ देर मिलकर औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। भगवान से यही दुआ है कि मेरा भाई जल्द रिहा होकर घर वापस आए। दो मिनट की इस मुलाकात में भाई-बहन के बीच बहुत कुछ कहने को था, लेकिन वक्त कम था। राखी बांधी गई, मिठाई खिलाई गई और फिर मुलाकात खत्म हो गई। जेल अधीक्षक बोले- रक्षासूत्र याद दिलाएगा सही रास्ते की सेंट्रल जेल अधीक्षक आर. अनंतेश्वर ने बताया- रक्षाबंधन को देखते हुए जेल में विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई। बहनों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े, इसके लिए सुबह से ही बंदियों को मुख्य गेट के पास बुलाया गया। यहां बहनों ने भाइयों को राखी बांधी और करीब दो मिनट तक बातचीत की। उन्होंने कहा- रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई को बेहतर इंसान और समाज का जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प दिलाने का दिन भी है। जेल बंदियों का स्थायी घर नहीं है। बाहर का खुला समाज ही उनका असली घर है। रक्षासूत्र का संदेश यही है कि बंदी सजा पूरी करने के बाद अपराध से दूरी बनाकर परिवार और समाज के बीच बेहतर नागरिक बनकर लौटें।
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