बाल चिकित्सालय की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा:रात होते ही आरएनटी के अस्पतालों से स्टाफ गायब; भटक रहे मरीज, परिजन खींच रहे स्ट्रेचर

बाल चिकित्सालय की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा:रात होते ही आरएनटी के अस्पतालों से स्टाफ गायब; भटक रहे मरीज, परिजन खींच रहे स्ट्रेचर




संभाग के सबसे बड़े आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों (एमबी और सुपर स्पेशियलिटी) में रात के वक्त मरीजों की सांसें सिस्टम के भरोसे नहीं, बल्कि परिजनों की मशक्कत पर टिकी हैं। दैनिक भास्कर ने तीन दिन तक पड़ताल की। चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। शाम ढलते ही अस्पतालों से सरकारी मशीनरी गायब हो जाती है। कहीं एक्सरे कक्षों पर ताले लटक रहे हैं, तो कहीं कंट्रोल रूम लावारिस पड़े हैं। बायोमेट्रिक उपस्थिति के दावों के बीच ड्यूटी से नदारद रहने का यह खेल मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है। वेतन पूरा तो ड्यूटी अधूरी क्यों? बाल चिकित्सालय – एक्सरे के बाहर ताला, मरीज 3 घंटे परेशान शुक्रवार रात 8 बजे कोटड़ा से आए इमरजेंसी मरीज और आईसीयू से रेफर महिलाएं एक्सरे कक्ष के बाहर खड़े रहे, लेकिन वहां कुंडी बंद थी। 3 घंटे तक वे गलियारों में भटकते रहे। रात 11 बजे कार्मिक पहुंचा। शनिवार को भी यही हाल था। सिक्योरिटी सुपरवाइजर का परिजन नीलेश कल्याणा उनसे उलझता दिखा। एसएसबी – लावारिस कंट्रोल रूम, शाम को लिफ्टमैन गायब सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) में रविवार शाम 6 बजे चौथे तल पर एक्सरे रूम बंद मिला। अस्पताल की रीढ़ कहे जाने वाले कंट्रोल रूम में सन्नाटा था। भर्ती, डिस्चार्ज या मृत्यु होने पर आरजीएचएस या चिरंजीवी डेटा अपलोड करने वाला कोई नहीं था। लिफ्ट लॉबी में सुबह तक लिफ्टमैन रहता है, शाम को भाग जाता है। एमबी इमरजेंसी – वार्ड बॉय नहीं, परिजन स्ट्रेचर धकेलने को मजबूर इमरजेंसी वार्ड में वार्ड बॉय और महिला कार्मिक अपनी सीटों से नदारद मिले। ड्यूटी आवर्स में कार्मिकों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों के परिजन खुद ही स्ट्रेचर धकेलने को मजबूर दिखे। इमरजेंसी के पास स्थित ईसीजी कक्ष से भी कार्मिक अक्सर नदारद रहते हैं, जिससे हार्ट पेशेंट्स को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। जिम्मेदारों ने कहा- सबको अलर्ट कर रहे हैं, खामियां सुधारेंगे “व्यवस्थाओं में जो भी कमियां सामने आई हैं, उन्हें सुधारा जाएगा। सभी कार्मिकों को अलर्ट किया जा रहा है। समय पर कोई भी अनुपस्थित पाया गया, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। कंट्रोल रूम में इसलिए कार्मिक नहीं थे, क्योंकि वहां पर पेस्ट कंट्रोल का काम करवाया गया था। वहां के कर्मचारी आरजीएसएच के दूसरे काउंटर पर बैठकर काम कर रहे थे।”
-डॉ. आरएल सुमन (अधीक्षक, एमबी अस्पताल) एवं डॉ. विपिन माथुर (अधीक्षक, एसएसबी)



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