रेलवे बोर्ड ने 'चिकन नेक' वैकल्पिक मार्ग को मंजूरी दी:बांग्लादेश-नेपाल से जुड़ेंगे 10 नए रेल कॉरिडोर, ₹30 करोड़ स्वीकृत

रेलवे बोर्ड ने 'चिकन नेक' वैकल्पिक मार्ग को मंजूरी दी:बांग्लादेश-नेपाल से जुड़ेंगे 10 नए रेल कॉरिडोर, ₹30 करोड़ स्वीकृत




पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण ‘चिकन नेक’ के लिए वैकल्पिक रेल मार्ग विकसित करने की दिशा में रेलवे बोर्ड ने एक अहम कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने बांग्लादेश और नेपाल के साथ रेल संपर्क मजबूत करने के उद्देश्य से 14 फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी दी है। इन सर्वे के लिए ₹30.05 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। वैकल्पिक रेल मार्गों की संभावनाओं की तलाश शुरू स्वीकृति पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह मंजूरी “पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल के साथ रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और चिकन नेक के लिए वैकल्पिक मार्ग” के उद्देश्य से दी गई है। यह दर्शाता है कि रेलवे ने आधिकारिक तौर पर वैकल्पिक रेल मार्गों की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी है। कुल 14 परियोजनाओं में से 8 भारत-बांग्लादेश और 2 भारत-नेपाल रेल संपर्क से संबंधित हैं। ये परियोजनाएं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सर्वे के लिए ₹71 लाख आवंटित किए गए बांग्लादेश के रास्ते बालुरघाट–हिली–परबतिपुर–गीतालदह रूट के सर्वे के लिए ₹71 लाख आवंटित किए गए हैं। इसी तरह, 250 किलोमीटर लंबे बालुरघाट–हिली–गाइबांधा–मेंदीपाथर कॉरिडोर के सर्वे के लिए ₹6.25 करोड़ मंजूर हुए हैं। गेदे–दर्शना–अगरतला और बेलोनिया–फेनी–चट्टोग्राम रूट का भी सर्वे किया जाएगा। नेपाल से संबंधित परियोजनाओं में बिराटनगर–न्यू माल जंक्शन के लिए ₹4.75 करोड़ और सीमांचल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण गलगलिया–भद्रपुर–काजली बाजार रूट के लिए ₹31.25 लाख स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में बालुरघाट–हिली (29.60 किलोमीटर) नई रेल लाइन पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसी हिली को आगे बांग्लादेश से जोड़ने के लिए सर्वे को मंजूरी मिली है। यदि इस पर सहमति बनती है, तो यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कॉरिडोर बन सकता है। ,फाइनल लोकेशन सर्वे पर विस्तृत अध्ययन विशेषज्ञों के अनुसार,फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) में अलाइनमेंट,भूमि अधिग्रहण,अनुमानित लागत और परियोजना की व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अभी केवल सर्वे को मंजूरी मिली है,निर्माण कार्य को नहीं। यदि तीनों देशों के बीच सहमति बनती है और ये परियोजनाएं व्यवहार्य पाई जाती हैं, तो पूर्वोत्तर भारत का रेल नक्शा पूरी तरह बदल सकता है। इससे व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही को नई गति मिलेगी। सीमांचल और उत्तर बंगाल अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क के केंद्र बन सकते हैं। इन परियोजनाओं का भविष्य सर्वे रिपोर्ट और संबंधित द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर करेगा।



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