सरगुजा में प्रसव के दौरान जच्चे-बच्चे की मौत:घर में कराया जा रहा था प्रसव, स्वास्थ्य विभाग ने कहा-हॉस्पिटल जाने कहा था
सरगुजा के ग्राम सकरिया में 26 वर्षीय प्रसूता और गर्भस्थ शिशु की डिलेवरी के दौरान मौत हो गई। घर में ही प्रसूता का प्रसव गांव की दाई के द्वारा कराया जा रहा था। प्रसूता को खून की कमी थी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रसूता को हॉस्पिटल जाने और आयरन शुक्रोज चढ़ाने की सलाह दी गई थी। परिजनों ने मामले में लापरवाही की। मामला लखनपुर ब्लॉक का है। जानकारी के मुताबिक, ग्राम सकरिया के दर्रीडुगू निवासी प्रसूता सुखनी मझवार (26 वर्ष)का प्रसव मंगलवार सुबह घर में कराया जा रहा था। प्रसव के दौरान सुखनी और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मामले की सूचना मितानिन ने लखनपुर बीएमओ को दी। बीएमओ के निर्देश पर आरएमए डा. विनोद कुमार भार्गव सकरिया पहुंचे और परिजनों का बयान दर्ज किया। खून की कमी के कारण मौत, परिजनों को दी गई थी सलाह
परिजनों से पूछताछ में पता चला कि मृतका सुखनी मझवार अपने पति दिनेश मझवार के साथ तमिलनाडू में रहकर काम करती थी। वह अपने पति के साथ 14 जून को वापस घर लौटी थी। वह 8 माह की प्रेग्नेंट थी। 21 जून को गांव की मितानिन सुखनी मझवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी जांच के लिए लेकर गई थी। जांच के दौरान सुखनी का ब्लड एचबी 6.6 पाया गया था और बीपी बढ़ा हुआ था। स्वास्थ्य विभाग ने सुखनी को अगले दिन हॉस्पिटल आकर आयरन शुक्रोज चढ़ाने और जिला अस्पताल अंबिकापुर ले जाकर जांच कराने की सलाह दी थी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सुखनी अपना इलाज कराने न तो अंबिकापुर ही गई और न ही उसे आयरन शुक्रोज चढ़ाया गया। जांच के करीब एक पखवाड़े बाद उसे मंगलवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो घर में ही गांव की मितानिन द्वारा उसका प्रसव कराया जा रहा था। प्रसव के दौरान मां-बच्चे दोनों की मौत हो गई। खून की कमी के कारण हुई मौत
आरएमओ डा. विनोद कुमार भार्गव ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर खून की कमी से जच्चे-बच्चे की मौत होना पाया गया है। खून की कमी और कमजोरी होने के बावजूद प्रसूता का सही उपचार नहीं कराया गया। जागरूकता की कमी के कारण यह स्थिति बनी। मितानिनों को समझाइश दी जा रही है कि सभी प्रसूताओं की नियमित जांच कराएं।
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