सिद्धार्थनगर में दो दिन से झमाझम बारिश:धान की फसल को संजीवनी, नदियां खतरे से दूर
सिद्धार्थनगर में पिछले दो दिनों से हो रही झमाझम बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। इस समय पर हुई वर्षा से धान की फसल को नई संजीवनी मिली है और खेतों में पर्याप्त पानी भर गया है। जिन किसानों को पहले सिंचाई के लिए डीजल पंप का उपयोग करना पड़ रहा था, उन्हें अब राहत मिली है। हालांकि, लगातार बारिश के कारण प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सभी नदियां अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं और जिले में बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 3 अगस्त की गेज रिपोर्ट के अनुसार, बानगंगा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा सहित सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर में हल्की वृद्धि दर्ज की गई है। बानगंगा बैराज का जलस्तर 93.40 मीटर, बांसी पुल पर राप्ती नदी का जलस्तर 81.08 मीटर और बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर 89.88 मीटर मापा गया। सभी प्रमुख गेज स्टेशनों पर जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, जिससे फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन लगातार नदियों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इस वर्ष मानसून की शुरुआत अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही थी। जून और जुलाई में सामान्य से कम वर्षा के कारण कई स्थानों पर धान की रोपाई प्रभावित हुई थी और किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ी थी। हालांकि, अगस्त की शुरुआत में मौसम ने करवट ली और लगातार दो दिनों की अच्छी बारिश ने स्थिति को बदल दिया। खेतों में पर्याप्त पानी भरने से धान की बढ़वार के लिए अनुकूल वातावरण बन गया है। एक जून से तीन अगस्त तक जिले में इस वर्ष लगभग 335 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 405 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जिससे इस बार अब तक लगभग 70 मिलीमीटर कम वर्षा हुई है। हालांकि, पिछले दो दिनों की लगातार बारिश से वर्षा की कमी तेजी से कम हुई है। यदि आने वाले दिनों में भी इसी तरह रुक-रुक कर बारिश होती रही, तो यह अंतर और घट सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल के लिए अगस्त का पहला पखवाड़ा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान खेतों में पर्याप्त पानी रहने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल की बढ़वार अच्छी होती है। लगातार हो रही बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना भी मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने बारिश को इस सीजन की सबसे राहतभरी बारिश बताया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक जिले में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ तेज बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग ने नदियों के जलस्तर पर नजर बनाए रखने और निचले इलाकों में सतर्कता बरतने की सलाह दी है, हालांकि फिलहाल किसी नदी के खतरे के निशान पार करने की आशंका नहीं है।
लगातार बारिश, सामान्य नदी स्थिति और खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचने से जिले में खरीफ की खेती को नई रफ्तार मिली है। यदि मौसम का यही रुख बना रहा तो धान की फसल के बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ जाएगी और किसानों को इस मानसून का पूरा लाभ मिल सकेगा।
Source link

