हिमाचल हाईकोर्ट का सरकार को झटका:जिन पंचायतों के गठन-डिलिमिटेशन में नियमों का पालन नहीं, वहां चुनाव नहीं होंगे, 196 पंचायतों की वैधता पर सवाल
हिमाचल हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। महिला मंडल उमरी समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और सीमांकन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया कानून के अनुसार ही होनी चाहिए और नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि डिलिमिटेशन तय प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया है, तो उसे अवैध माना जाएगा और चुनाव में उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद 13 फरवरी 2026 के बाद बनाई गई नई पंचायतों पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि कई मामलों में नियमों का पूरा पालन नहीं किया गया। डिलिमिटेशन के दौरान जहां आपत्तियों और सुझावों के लिए पर्याप्त समय देना जरूरी था, वहां प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई। ऐसे में इन पंचायतों में चुनाव कराना संभव नहीं होगा। जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बैंच ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होती है, पहले सरकार पंचायतों का गठन या पुनर्गठन करती है और उसके बाद संबंधित उपायुक्त (डीसी) क्षेत्रों का सीमांकन करता है। इस दौरान नोटिस जारी करना, आपत्तियां लेना और उन पर निर्णय देना जरूरी है। इन नियमों की अनदेखी होने पर पूरी प्रक्रिया अमान्य मानी जाएगी। 13 फरवरी 2026 के बाद की कार्रवाई पर कोर्ट सख्त कोर्ट ने 13 फरवरी 2026 के बाद की गई कार्रवाइयों पर खास सख्ती दिखाई है। आदेश में कहा गया है कि जिन पंचायतों में इस तारीख के बाद डिलिमिटेशन किया गया और नियमों का पालन नहीं हुआ, वहां चुनाव पुराने ढांचे के आधार पर ही कराए जाएंगे। यानी हाल में किए गए बदलाव फिलहाल लागू नहीं होंगे। जहां नियमों का पालन, वहां चुनाव होंगे साथ ही, जहां सभी नियमों का ठीक से पालन किया गया है, वही पंचायतें और उनका सीमांकन मान्य होगा और उन्हीं के आधार पर चुनाव कराए जा सकेंगे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह 7 अप्रैल 2026 तक आरक्षण रोस्टर जारी करे और तय समय सीमा के भीतर पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी करे। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के पंचायत चुनावों पर पड़ेगा। कई जगहों पर प्रशासन को पुराने ढांचे के आधार पर ही चुनाव कराने होंगे। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में जल्दबाजी या नियमों की अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रदेश में लगभग 196 पंचायतें नई बनीं बता दें कि राज्य सरकार ने 13 फरवरी के बाद लगभग 196 नई पंचायतें बनाई है। इनमें से कितनी पंचायतें बनाने में नियमों का पालन हुआ है और कितनी में नियमों की अनदेखी हुई है, पंचायतीराज विभाग यह देखने में जुट गया है। अभी अंतिम फैसला नहीं: कोर्ट आखिर में कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात की जल्दबाजी और खास परिस्थितियों को देखते हुए अभी सिर्फ जरूरी मुद्दों पर ही फैसला दिया है। ग्राम पंचायतों के गठन, विभाजन, पुनर्गठन और सीमांकन की वैधता से जुड़े बाकी मुद्दों पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इन सभी मामलों को आगे के लिए खुला रखा गया है, ताकि इन्हें बाद में अलग से उचित प्रक्रिया के तहत तय किया जा सके। अगर याचिकाकर्ता चाहें, तो वे उचित समय के भीतर नई याचिका दायर कर इन मुद्दों पर फिर से सुनवाई करवा सकते हैं।
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