दुर्ग में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में कोर्ट का फैसला:आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास, 5 हजार अर्थदंड
दुर्ग जिले के पाटन स्थित अपर सत्र न्यायालय (पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी नरेंद्र टंडन को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामला अमलेश्वर थाना क्षेत्र के ग्राम खमरिया मोतीपुर का है। 16 वर्षीय पीड़िता 22 अक्टूबर 2025 की शाम घर से फैंसी दुकान जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद अमलेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराई। बहला-फुसलाकर साथ ले गया आरोपी इसके बाद पुलिस ने गुम इंसान रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में अपराध क्रमांक 140/2025 के तहत मामला कायम किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नरेंद्र टंडन नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। गवाहों और सबूतों के आधार पर दोषी करार प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर की अदालत में हुई। विशेष लोक अभियोजक शेखर वर्मा ने गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। कोर्ट ने कहा- नाबालिग की सहमति मान्य नहीं न्यायालय ने अपने फैसले में साफ कहा कि नाबालिग की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती। शादी का प्रलोभन देकर किया गया यह अपराध गंभीर श्रेणी में आता है। अलग-अलग धाराओं में भी सजा अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और धारा 87 के तहत भी 5-5 वर्ष सश्रम कारावास व अर्थदंड से दंडित किया। वहीं पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष सश्रम कारावास की मुख्य सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं भरा तो बढ़ेगी सजा कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी अर्थदंड जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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