यूक्रेन युद्ध में फतेहाबाद के दूसरे युवक की भी मौत:रूसी आर्मी में हुआ था भर्ती; पिता का पहले हो चुका निधन
रूस की आर्मी में भर्ती होने के बाद यूक्रेन युद्ध में धकेले गए फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया के दूसरे युवक की भी मौत हो गई है। युवक विजय पूनिया की डेडबॉडी दिल्ली भेजी गई है। जहां से डेडबॉडी को रिसीव करने के लिए परिवार के लोग दिल्ली गए हैं। इससे पहले इसी गांव के युवक अंकित जांगड़ा की भी मौत हो गई थी। अंकित और विजय दोनों बेहतर भविष्य की तलाश में रूस गए थे। वहां अच्छी सैलरी का लालच देकर उन्हें रूस की सेना में भर्ती करवा दिया गया। इसके बाद यूक्रेन युद्ध में धकेल दिया गया। विजय पूनिया के पिता का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। परिवार में सिर्फ मां और छोटा भाई है। इन युवकों की वापसी के लिए फतेहाबाद भाजपा जिलाध्यक्ष से लेकर सीएम नायब सैनी तक ने प्रयास किए थे। वहीं, कई विपक्षी सांसदों ने भी लेटर लिखे थे। मगर दोनों को ही बचाया नहीं जा सका। जुलाई 2025 में गया था विजय पूनिया जानकारी के अनुसार, विजय पूनिया जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां उसे नौकरी का झांसा देकर एजेंटों ने अपने जाल में फंसा लिया और जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन के डोनेत्स्क जैसे खतरनाक युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। विजय के साथ गांव का ही अंकित जांगड़ा (23) भी इसी तरह ठगी का शिकार हुआ था। अंकित फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर रूस पहुंचा था । 13 सितंबर 2025 को उनका आखिरी वाइस मैसेज आया था कि सुबह हमें युद्ध में लेकर जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो। इसके बाद दोनों से संपर्क टूट गया था। 4 अप्रैल को अंकित का पार्थिव शरीर गांव लाया गया था। अब 25 दिन बाद विजय का शव भी आ गया है। अब जानिए यूक्रेन में आखिर कैसे फंसे युवक… स्टडी वीजा पर गए थे दोनों युवक: गांव कुम्हारिया के अंकित जांगड़ा (23) और विजय पूनिया (25) स्टडी वीजा पर रूस गए थे। अंकित के भाई रघुवीर ने बताया कि सात महीने पहले अंकित की कॉल आई थी। उसके साथ तब विजय भी था। अंकित ने उधर से कहा, हमें बचा लो। हमारे पास एक-दो दिन ही बचे हैं। इसके बाद हमें युद्ध में भेज दिया जाएगा। 12वीं के बाद गया अंकित: रघुवीर ने बताया कि अंकित 12वीं की पढ़ाई पूरी कर 14 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। इसमें फरीदाबाद की एजेंट ने उनकी मदद की थी। अंकित ने मॉस्को के एमएसएलयू कॉलेज में लेंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया था। अंकित के पिता रामप्रसाद ने बताया कि अंकित ने पढ़ाई के दौरान फ्री टाइम में किसी रेस्टोरेंट में हेल्पर का काम शुरू किया, ताकि अपना खर्चा निकाल सके। दोबारा बिजनेस वीजा से गया विजय: विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया था। वीजा एक्सटेंड नहीं हुआ, तो एक महीने बाद वापस आ गया था। फिर अक्टूबर 2024 में दोबारा गया। 6 महीने रहकर मार्च के आखिर में वापस गांव आया। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को विजय एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर रशिया गया। परिवार का कहना है कि लोन लेकर उसे विदेश भेजा था। रूस में महिला ने लालच देकर फंसाया: रघुवीर ने बताया कि करीब आठ महीने पहले एक महिला ने अंकित व विजय के साथ अन्य 13 लोगों को रशियन आर्मी में नौकरी दिलाने की लालच दिया था। 15 लोगों का एक बैच बनाया। जाॅब दिलाने वाली को वॉट्सऐप पर कॉल की, तो महिला ने कहा कि अंकित और विजय तो मर गए हैं। इसके बाद महिला ने नंबर ब्लॉक कर दिया। 11 सितंबर 2025 के बाद से नहीं हुआ संपर्क इन दोनों युवकों से परिवार के सदस्यों का 11 सितंबर 2025 के बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ था। लगातार दोनों परिवार उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। मगर इसी बीच अंकित की डेडबॉडी भारत भेज दी गई है। वहीं, दूसरे युवक विजय का भी अभी तक कोई पता नहीं चल पा रहा है। युवकों की वापसी के लिए कई सांसदों ने लिखे थे लेटर बता दें कि, इन दोनों युवकों की वापसी के लिए परिवार की ओर से काफी प्रयास किए गए थे। परिजन दिल्ली और चंडीगढ़ में रूसी एंबेसी, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से मदद की गुहार लगाने के लिए गए। सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा, राजस्थान से सांसद हनुमान बैनीवाल ने भी विदेश मंत्री जयशंकर को इस मामले में पत्र लिखा था।
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