नालंदा में लगेगा मलमास मेला, 6 अस्पताल होंगे तैयार:20 उपचार केंद्र भी बनेंगे, 24 घंटे लोगों को मिलेगी सुविधा; डॉक्टर रहेंगे तैनात

नालंदा में लगेगा मलमास मेला, 6 अस्पताल होंगे तैयार:20 उपचार केंद्र भी बनेंगे, 24 घंटे लोगों को मिलेगी सुविधा; डॉक्टर रहेंगे तैनात




पर्यटक नगरी राजगीर में आने वाले 17 मई से शुरू होने वाले सुप्रसिद्ध मलमास मेले को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। लाखों की संख्या में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा व्यवस्था का एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस बार मेले के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को विकेंद्रीकृत करते हुए शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों में छह अस्थाई अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा। इन सभी अस्पतालों में चार-चार बेड की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत भर्ती किया जा सके। इसके अलावा, मेला क्षेत्र के विभिन्न यात्री शेडों और आवासन स्थलों पर 20 उपचार केंद्र भी संचालित किए जाएंगे, जहां प्राथमिक चिकित्सा की हर संभव सुविधा उपलब्ध रहेगी। दो अस्पताल स्थापित किए जा रहे अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गौरव कुमार ने इस संबंध में जानकारी दी। इन्होंने बताया कि चिकित्सा व्यवस्था को आसान बनाने के लिए ब्रह्मकुंड परिसर में दो अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि वीआईपी टेंट सिटी, रेलवे स्टेशन और झुनकी बाबा मंदिर के पास एक-एक अस्पताल बनाया जाएगा। इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली को चौबीसों घंटे सुचारू रखने के लिए एक एमबीबीएस चिकित्सक, एक सीएचओ और जीएनएम सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ की तैनाती तीन पालियों में की जाएगी। डॉ. गौरव ने आश्वस्त किया कि इन केंद्रों पर केवल सामान्य चिकित्सा ही नहीं, बल्कि ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता और आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक भी सुनिश्चित किया जाएगा। परिवहन और आपातकालीन सेवाओं पर भी विशेष ध्यान मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए परिवहन और आपातकालीन सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए छोटे और बड़े आकार के कुल आठ एम्बुलेंस को विशेष रूप से मेले के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, राजगीर अनुमंडल अस्पताल में भी एक अलग इमरजेंसी वार्ड बनाया जा रहा है, जहां अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है, ताकि मुख्य अस्पताल पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को संभाला जा सके। पूरे एक महीने तक चलने वाले इस आस्था के समागम में 20 विभिन्न स्थानों पर प्राथमिक चिकित्सा शिविर भी लगाए जाएंगे, जहां श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के 24 घंटे चिकित्सा परामर्श और प्राथमिक उपचार मिल सकेगा।



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