हसदेव अरण्य में केते-एक्सटेंशन से कटेंगे 7 लाख पेड़:पूर्व डिप्टी सीएम,हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने FAC में दर्ज कराई आपत्ति,कहा-रेगिस्तान बनेगा छत्तीगसढ़
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आबंटित केते एक्सटेंशन माइंस की स्वीकृति के लिए पूर्व केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की बैठक में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव और हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि नई खदान की स्वीकृति से 7 लाख पेड़ कटेंगे। समृद्ध और जैव विविधता वाले हसदेव जंगल के कटने से हसदेव नदी और बांगो जलाशय का विनाश होगा। इससे छत्तीसगढ़ रेगिस्तान में तब्दील होगा। फारेस्ट एडवायजरी कमेटी (FAC) की शुक्रवार को नई दिल्ली में बैठक के पहले पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कमेटी से जुड़े सदस्यों से फोन कॉल पर बात की तथा ईमेल व वाट्सएप से कई दस्तावेज भेज कर ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ के संरक्षण एवं संवर्धन पर खतरे को लेकर भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने केते एक्सटेंशन कोल माइंस के लिए क्लीयरेंस नहीं देने की मांग रखी। 7 लाख पेड़ कटेंगे, रामगढ़ का विनाश तय
सिंहदेव ने कहा कि केते एक्सटेंशन माइंस में 1,742 हेक्टेयर जंगल की जमीन ली जानी है, जिसमें 7 लाख पेड़ कटेंगे। खदान सीमा से ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ की दूरी 8 किलोमीटर है, जिसे गलत तरीके से 10 किलोमीटर से ज्यादा दूर बताया गया है। रामगढ़ की प्राचीन पहाड़ी, गुफाएँ और मंदिर भी नए खदान से नष्ट हो जाएँगे। नो-गो एरिया घोषित करने की मांग
टीएस सिंहदेव ने डब्लूआईआई देहरादून की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसे नो गो एरिया में शामिल करने की मांग की है। 26 जुलाई, 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के हसदेव अरंड कोयला क्षेत्र में कोयला खनन के खिलाफ और नई कोयला खदानों को रद् करने के खिलाफ एकमत से प्रस्ताव पारित किया गया। वर्तमान में चल रहे खदानों में अगले 20 सालांे का कोयला शेष होना रिपोर्ट में बताया गया है, इसलिए नए माइंस की जरूरत नहीं है। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने भी दर्ज कराई आपत्ति
केते एक्सटेंशन खदान को लेकर हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने भी फारेस्ट एडवाजरी कमेटी के समझ अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। राज्य अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने कहा कि नई खदान का 99 प्रतिशत एरिया डेंस फारेस्ट है। इसमें 7 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इससे भारत का फेफड़ा कहे जाने वाले इलाके के जंगल का विनाश तय है। हसदेव बचाओ समिति ने केते एक्सटेंशन को स्वीकृति न देने की मांग करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हसदेव बचाओ समिति ने कहा कि इस खदान को स्वीकृति मिली तो छत्तीसगढ़ रेगिस्तान बन जाएगा। बड़े इलाके में पेड़ों की कटाई के कारण पर्यावरण का विनाश तय है। यह सिर्फ प्रभावितों की लड़ाई नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यावारण को बचाने की लड़ाई है।
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