मामला खुले नहीं इसलिए रेफर नहीं किया, नतीजा- फिर मौत:लापरवाही छिपाने के लिए दो दिन वेंटिलेटर पर रखा, 24 घंटे में जेके लोन की दूसरी महिला पेशेंट की मौत

मामला खुले नहीं इसलिए रेफर नहीं किया, नतीजा- फिर मौत:लापरवाही छिपाने के लिए दो दिन वेंटिलेटर पर रखा, 24 घंटे में जेके लोन की दूसरी महिला पेशेंट की मौत




जेके लोन अस्पताल से रविवार रात को एक और महिला पिंकी महावर को एसएसबी ब्लॉक मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया। जिसकी देर रात मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि दो दिन तक इस पेशेंट को गंभीर होने के बाद भी बेहतर इलाज के लिए रेफर हीं नही किया गया ताकि किडनी फेल्योर का एक और मामला खुल न जाए। जब स्थिति हाथ से जाती दिखी उसके बाद जेके लोन अस्पताल प्रशासन ने रविवार को उसे आनन फानन में रेफर किया। श्रीरामनगर की रहने वाली पिंकी को सात मई को दोपहर तीन बजे जेके लोन अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती करवाया गया था। सात मई की रात करीब 12 बजे सिजेरियन से डिलीवरी हुई और उसने बच्ची को जन्म दिया। दूसरे दिन सुबह से उसकी तबियत बिगड़ना शुरू हुई। यूरिन आऊटपुट बंद हो गया और बीपी लो हो गया। इसके बाद उसे जेके लोन अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया। वहां उसकी तबियत और बिगड़ती गई। जब पिंकी की हालत गंभीर हो गई, तब कहीं जाकर उसे एसएसबी के लिए रेफर किया। रात को करीब आठ बजे जेके लोन से एंबुलेंस के जरीये दो डॉक्टर्स की टीम साथ आई और पिंकी को भर्ती करवाया। जिसके बाद एसएसबी में भी उसे वेंटिलेटर पर लिया गया लेकिन रात 12.30 बजे उसकी मौत हो गई। मामले को दबाने की कोशिश में लगे रहे
पिंकी की तबियत आठ तारीख से ही बिगड़ गई थी। दो बार ऑपरेशन हुआ, वेंटिलेटर पर लेना पड़ा और बेहोशी की हालत में थी। लेकिन इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने ये जहमत तक नहीं उठाई कि महिला को और बेहतर और डेडीकेटेड इलाज के लिए रेफर कर दिया जाए क्योंकि लगातार किडनी फेल्योर के मामले दोनों अस्पताल जेके लोन और नए अस्पताल में सामने आ रहे है। शनिवार को ही दो महिलाओं को जेके लोन से एसएसबी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया था। ऐसे में जेके लोन अस्पताल प्रशासन ने पिंकी महावर को अस्पताल के आईसीयू में ही रहने दिया और इसकी भनक तक किसी को नहीं लगने दी कि एक और ऐसा केस हुआ है। यही नहीं, जब उसे रेफर किया गया तो अस्पताल के मेन गेट के बजाय पिछले दरवाजे से निकाला गया। पिंकी के पहले एक चार साल का बेटा है। इस डिलीवरी में उसने बच्ची को जन्म दिया था। पिंकी के परिवार ने कहा है कि जब तक उसकी मौत के सही कारण और लापरवाहों पर कार्यवाही नहीं होगी बॉडी नहीं लेंगे। ऑपरेशन के सात घंटे बाद किडनी ने काम करना किया बंद
पिंकी का ऑपरेशन होने के बाद उसे गायनिक वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। रात को उसे यूरिन आऊटपुट भी आ रहा था। पिंकी की जेठानी संतोष ने बताया कि आठ मई को सुबह करीब आठ बजे उसकी यूरिन की थैली को खाली किया गया। इसके बाद जब दोबारा थैली लगाई गई उसके बाद से यूरिन आऊटपुट नहीं था। राउंड पर डॉक्टर आए तो उन्हें भी बताया तो उन्होंने कहा कि सब सामान्य हो जाएगा। इसके बाद डॉक्टर्स वहां से चले गए। बार बार हम यही कहते रहे कि इसके यूरिन नहीं आ रहा है और वह पेट में दर्द की शिकायत कर रही है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। दोपहर तीन बजे किसी ने कुछ नहीं किया बस आते और दवाईयां देते इंजेक्शन लगा देते। दोपहर तीन बजे तक भी जब यूरिन आऊटपुट नहीं था तब पिंकी को आईसीयू में लिया गया। पिंकी के पति चंद्रप्रकाश ने बताया कि आठ मई को दोपहर तीन बजे उसे आईसीयू में लिया और कुछ देर बाद हमे कहा कि पिंकी की बच्चेदानी में खून जम गया है और खून को निकालना पडे़गा। पहले कहा- बच्चेदानी में खून जम गया, दो बार किया ऑपरेशन
इसके बाद उसे फिर से ऑपरेशन थियेटर में ले लिया। इसके बाद उसकी बच्चेदानी को निकाल लिया। पंद्रह घंटे के अंदर ही दो बार उसका ऑपरेशन किया। इसके बाद बच्चेदानी को एक डिब्बे में रखकर बेड के पास ही रख दिया। कहा कि इसकी जांच करवाएंगे। लेकिन दस तारीख तक भी वह डिब्बा वहीं पड़ा था किसी ने कहीं जांच के लिए नहीं भेजा। ऑपरेशन के बाद उसे फिर आईसीयू में भर्ती किया। पिंकी की हालत बहुत खराब हो गई थी और वह बेहोशी की हालत में थी। जिसके बाद आठ तारीख को ही शाम को वेंटिलेटर पर ले लिया। हम सबको आईसीयू से बाहर ही रखा जाता सिर्फ एक महिला को अंदर जाने दे रहे थे। हम आते जाते डॉक्टर्स और स्टाफ से पूछते तो वह कहते कि इलाज चल रहा है लेकिन क्या हो रहा था, ये नहीं बता रहे थे। नौ मई को भी पूरा दिन ऐसे ही निकाल दिया। उसकी कई बार जांचे करवाई गई। हमे तो शक हो ही गया था कि जो केस चल रहे हैं वहीं किडनी फेल होने का मामला हुआ है लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कुछ नहीं बताया, बस बार कागजों पर साइन करवाते रहे। दस मई को बताया- किडनी काम नहीं कर रही
चंद्रप्रकाश ने बताया कि आईसीयू में परिवार के सदस्यों को जाने नहीं दे रहे थे। रविवार, दस मई को मुझे बुलाकर कहा कि उसकी किडनी काम नहीं कर रही है। इसके बाद जब रिश्तेदार आए और उन्होंने विरोध जताना शुरू किया। लेकिन इसके बाद भी अस्पताल से उसे बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट नहीं कर रहे थे। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने कांग्रेस नेता विद्याशंकर गौतम को जानकारी दी। उनके दखल के बाद मरीज को एसएसबी के नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट किया गया। चंद्रप्रकाश ने बताया कि शिफ्ट करने से पहले भी यही कहते रहे कि लिखकर दो कि अगर मरीज को कुछ हो या तो उसकी जिम्मेदारी डॉक्टर्स की नहीं है। लगातार किडनी फेल के मामले सामने आ रहे हैं। लीवर और किडनी दोनों फेल, पेट से निकल रहा था ब्लड़
रिश्तेदारों ने बताया कि पिंकी के जहां से नलची लगाई गई थी वहां से लगातार ब्लिडिंग हो रही थी। उसके खून रिसना कम ही नहीं हो रहा था। चार पांच बार तो उसे ब्लड़ चढ़ा दिया गया। वहीं पिंकी की जांच रिपोर्ट देखने पर पता लगा है कि उसके लीवर में भी दिक्कत है। बहुत बुरी हालत है। उसके शरीर में क्रिएटिनिन लेवल 2.44 एमजी आ रहा है जबकि नॉर्मल लेवल 0.60 से 1.50 तक माना जाता है। क्रिएटिनिन का स्तर ज्यादा होने का मतलब है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है और खून में अपशिष्ट जमा हो रहा है, जो किडनी के फेल होने का संकेत है। बिलीरुबिन का लेवल भी हाई जा रहा है। यह 2.24 एमजी आ रहा है जबकि नॉर्मल रेंज 0 से 0.4 तक ही है।
डायरेक्ट बिलीरुबिन लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है। इसके हाई होने का मतलब है कि लीवर काफी डेमेज हो गया है।



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