Jabalpur Sand Mining Scam | Mafia Looted Crores, Tender Delayed

Jabalpur Sand Mining Scam | Mafia Looted Crores, Tender Delayed


जबलपुर जिले में रेत खदानों की नीलामी नहीं होने से सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं इसका सीधा फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है।

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हालात यह हैं कि नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं और नर्मदा सहित दूसरी नदियों में रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। दैनिक भास्कर द्वारा लगातार मुद्दा उठाए जाने के बाद अब जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग संयुक्त कार्रवाई में जुट गए हैं।

जबलपुर की रेत खदान।

जबलपुर जिले में 31 खदानों को स्वीकृति

जबलपुर जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी के आसपास करीब 42 रेत खदानें हैं, जिनमें से 31 खदानों को एनजीटी से स्वीकृति मिली हुई है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए करीब 5 लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था, जिसकी कुल लीज राशि लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए तय की गई थी।

लेकिन ऊंची प्रीमियम राशि और अधिक निर्धारित उत्खनन मात्रा के कारण किसी भी ठेकेदार ने खदान लेने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन हालात जस के तस बने रहे।

खनिज कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी अधिक लागत पर खदान लेना घाटे का सौदा साबित हो सकता है। यही वजह है कि लगातार तीन बार टेंडर निकाले जाने के बावजूद कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया।

जबलपुर की रेत खदान।

वैध खदानें बंद होने से अवैध माफिया की सक्रियता बढ़ी

अब खनिज विभाग खदानों की संख्या, रेत की मात्रा और प्रीमियम दर कम करने की तैयारी में है, ताकि ठेकेदारों को आकर्षित किया जा सके। जानकारी के मुताबिक वर्तमान 5 लाख घनमीटर की सीमा को घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर किए जाने पर विचार चल रहा है।

इधर वैध खदानें बंद होने से अवैध खनन माफियाओं की सक्रियता तेजी से बढ़ गई है। रात होते ही बड़ी-बड़ी मशीनें, पोकलेन और हाइवा लेकर माफिया नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में उतर जाते हैं और धड़ल्ले से रेत निकालते हैं।

जब प्रशासन कार्रवाई करता है तो अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी फरार हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध रेत परिवहन खुलेआम होता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

नर्मदा में इस तरह से पुल बनाकर रेत खनन का रास्ता बनाया जाता है।

अवैध खनन का असर बाजार पर भी

अवैध खनन का असर अब बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। वैध खदानें बंद होने के कारण रेत की उपलब्धता कम हो गई है और दाम तेजी से बढ़ गए हैं। वर्तमान में जबलपुर में एक हाइवा रेत की कीमत 28 से 30 हजार रुपए तक पहुंच चुकी है, जबकि कटनी में महानदी की रेत 50 हजार रुपए प्रति हाइवा तक बिक रही है। निर्माण कार्यों पर भी इसका असर पड़ रहा है।

जिला खनिज अधिकारी एके राय ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में एसडीएम, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगंवा क्षेत्रों में कार्रवाई की।

नदी किनारे अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर बहाया गया है। वहीं भोपाल स्थित खनिज विभाग ने जबलपुर की खदानों से जुड़े दस्तावेज समीक्षा के लिए तलब किए हैं।

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एमपी में नर्मदा की धार मोड़कर रेत की लूट

मध्य प्रदेश में नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन जारी है। जबलपुर, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों में रेत माफिया खुलेआम नदियों से रेत निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर 24 घंटे हाईफाई मशीनें, पोकलेन, जेसीबी और नावों के जरिए खनन किया जा रहा है।पूरी खबर पढ़ें



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