ढीमरखेड़ा में प्रधानमंत्री मानधन योजना के पंजीयन शुरू:3 हजार रुपए मासिक पेंशन; आयु सीमा से आदिवासी महिलाएं निराश, हटाने की मांग
कटनी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत पंजीयन शुरू हो गए हैं। इस योजना के अंतर्गत, स्व-सहायता समूहों की पात्र महिलाओं को 60 साल की आयु पूरी होने पर 3 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलेगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत सभागार में विशेष पंजीयन शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में 18 से 40 साल आयु वर्ग की पात्र महिलाओं के दस्तावेजों का सत्यापन, थंब इंप्रेशन और पंजीयन किया जा रहा है। हालांकि, आयु सीमा के बंधन के कारण कुछ आदिवासी महिलाएं निराश होकर लौटीं। उन्होंने इस आयु सीमा को हटाने की मांग की है। इस योजना में 3 हजार रुपए खातों में मिलेगी एनआरएलएम की ब्लॉक प्रबंधक जया कोष्ठी ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं का भविष्य सुरक्षित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 से 40 वर्ष के बीच पंजीयन कराने वाली महिलाओं को 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर महीने 3 हजार रुपए की निश्चित पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत क्षेत्र में वर्ष 2017 से अब तक लगभग 2,204 स्व-सहायता समूह गठित किए गए हैं। इन समूहों से करीब 30 हजार महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। विभागीय अनुमान है कि शुरुआती चरण में 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 10 हजार महिलाओं को इस पेंशन योजना का सीधा लाभ मिल सकता है। उम्र के बंधन से कई महिलाएं निराश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाएं बैंक ऋण लेकर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में संलग्न हैं। इनमें मुर्गी पालन, स्कूली बच्चों के गणवेश वितरण, नल-जल योजना का संचालन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन दुकान) का संचालन, जैविक खेती, वाटरशेड योजना के तहत 94 भैंसों का वितरण एवं दुग्ध उत्पादन, तथा सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्य शामिल हैं। पेंशन की खबर सुनकर समूह की महिलाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बुढ़ापे में उन्हें पेंशन का सहारा मिलेगा। आदिवासी महिलाओं ने सरकार से गुहार लगाई जहां एक ओर युवा महिलाओं में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर कुछ मायूसी की तस्वीरें भी सामने आईं। जनपद कार्यालय के बाहर बैठी आदिवासी ग्राम कोठी की कुछ महिलाओं ने अपनी व्यथा साझा की। वे भी योजना का लाभ लेने और पंजीयन कराने जनपद कार्यालय पहुंची थीं, लेकिन उनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक होने के कारण पोर्टल पर उनका पंजीयन स्वीकार नहीं हो सका। निराश होकर पेड़ की छांव में बैठी इन आदिवासी महिलाओं ने सरकार से गुहार लगाई है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ी समस्त महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाए। उनके लिए उम्र का यह कड़ा प्रतिबंध हटाया जाए, ताकि बुढ़ापे की लाठी हर जरूरतमंद महिला को मिल सके।
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